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Gardening Tips: छतरपुर में 12 महीने ऐसी भाजियां खाई जाती हैं, जिन्हें घर पर आसानी से लगाया जा सकता है. इसके साथ ही ये स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती हैं. आइए जान लेते हैं कौन-कौन सी भजियां सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं.
छतरपुर जिले में 12 महीने ऐसी भाजियां खाई जाती हैं, जिन्हें घर के गार्डन में आसानी से लगाया जा सकता है. इसके साथ ही ये भाजियां स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती हैं. इन भाजियों को घर के गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है.

सबसे पहले बात करते हैं चौरई भाजी की. बारिश के मौसम में तो चौरई भाजी अपने आप ही हो जाती है. इसलिए लोग इसको बरसात के मौसम में खूब खाते हैं और इसे घर पर लगाना बहुत आसान होता है.

सर्दी-जुकाम जैसे वायरल फीवर से बचाने में भी यह मदद करती है. इस भाजी की तासीर गर्म होती है, इसलिए इस भाजी का उपयोग सर्दी-जुकाम को ठीक करने में किया जाता है.

छतरपुर जिले में चौरई भाजी के अलावा एक और भाजी मिलती है, जिसे क्षेत्रीय भाषा में चेच भाजी के नाम से जाना जाता है. ये भाजी भी छतरपुर जिले में खूब खाई जाती है.

ये भाजी भी 12 महीने खाने को मिल जाती है. इसे घर के गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है. हालांकि, बारिश के मौसम में तो ये अपने आप ही उग आती है.

छतरपुर जिले में नौरपा नाम की भाजी भी खूब खाई जाती है. इसे भी घर पर लगाना आसान होता है. कार्तिक के महीने में नौरपा की भाजी छतरपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में खूब खाई जाती है.

यह हरे रंग और लाल रंग की बाजी होती है. हरे रंग वाली 12 महीने मिलती है और लाल रंग की केवल बारिश के मौसम में मिलती है. यह आयरन से भरपूर होती है और इसे खाने से खून की कमी दूर होती है.

छतरपुर जिले में इसके अलावा भी दूसरी भाजियां उगाई जाती हैं, जैसे कि लेसी और चने की भाजी भी घर पर उगा कर खाते हैं. छतरपुर जिले में लोग सब्जी से ज्यादा भाजी खाना पसंद करते हैं और शायद इसलिए छतरपुर जिले में तमाम वह भांजियां हैं, जिन्हें लोग साल भर खाते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती हैं. हालांकि, कुछ भाजियां मौसम के अनुसार ही उगती हैं.