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MP Politics News: मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी बड़ी पहल करने जा रही है. एक खास सर्वे होने जा रहा है, जिसके बाद ही 2028 विधानसभा चुनाव में टिकट मिलेगा.
Bhopal News: मध्य प्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा-लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद आत्ममंथन का दौर शुरू कर दिया है. पार्टी अब अपने जनप्रतिनिधियों की लोकप्रियता का बड़ा मूल्यांकन करने जा रही है. जिला स्तर से प्रदेश स्तर तक संगठन को निर्देश दिए गए हैं कि विधायकों, पूर्व प्रत्याशियों और सक्रिय नेताओं के कामकाज पर जनता व कार्यकर्ताओं की राय ली जाए. इस फीडबैक के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान तक पहुंचाई जाएगी. प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) में ‘कनेक्ट सेंटर’ स्थापित किया जा रहा है, जो लगातार सर्वे का केंद्र बनेगा.
पिछले चुनाव में कांग्रेस ने सर्वे कर टिकट वितरण का दावा किया था, लेकिन परिणाम निराशाजनक साबित हुए. 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा को 163 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को मात्र 66. लोकसभा में भी पार्टी को झटका लगा. इन असफलताओं से सबक लेते हुए अब रणनीति बदली गई है. पार्टी का कहना है कि टिकट केवल लोकप्रियता और जमीनी पकड़ वाले नेताओं को दिए जाएंगे. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट किया कि 2028 विधानसभा चुनाव में सक्रिय और अच्छी छवि वाले चेहरे ही उतरेंगे. सर्वे प्रक्रिया निरंतर चलेगी, जो चुनाव से 3 साल पहले शुरू हो रही है.
सभी जिला पदाधिकारियों को ये निर्देश
प्रदेश कांग्रेस ने सभी जिलों के पदाधिकारियों को हार्डकोपी जारी की है. निर्देश हैं कि विधायकों, नगर पालिका-नगर परिषद प्रतिनिधियों का आकलन करें. इसके लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं से फीडबैक लें. इसमें 2022 नगरीय निकाय, 2023 विधानसभा और हाल के लोकसभा चुनावों के हार चुके प्रत्याशी शामिल हैं. सम्भावित उम्मीदवारों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी. कांग्रेस प्रवक्ता जितेंद्र मिश्रा ने कहा, “यह सिर्फ टिकट बंटवारे तक सीमित नहीं. संगठनात्मक मजबूती के लिए है. सकारात्मक रिपोर्ट वाले नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिलेंगी.”
भाजपा ने कसा तंज
पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2023 हार की मुख्य वजह जनता-मुद्दों से दूरी थी. प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार व्यक्तिगत रूप से निगरानी करेंगे. हालांकि, भाजपा ने तंज कसा. विधायक रामेश्वर शर्मा बोले, “कांग्रेस के बड़े नेता अपनी घटती लोकप्रियता से चिंतित हैं.” हाल ही में पार्टी की कार्यकारिणी बैठक में भी दिग्विजय सिंह, उमंग सिंघार जैसे दिग्गज अनुपस्थित रहे, जिससे गुटबाजी के सवाल उठे.
यह पहल कांग्रेस को पुनर्गठित कर सकती है, लेकिन सफलता फीडबैक की पारदर्शिता पर निर्भर. भाजपा इसे ‘आत्मचिंतन’ बताते हुए चुनौती दे रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी जुड़ाव से ही पार्टी मजबूत हो सकती है. फिलहाल, संगठन उत्साहित है, लेकिन आंतरिक कलह दूर करना चुनौती.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें