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Paddy Crop Care Tips: खेती जितना मुनाफे का सौदा है उतनी ही इसमें सिर दर्दी भी होती है. हर साल फसल पर कोई न कोई रोग अटैक जरूर करते हैं. ऐसे में अपने फसल को कैसे बचाएं, आइए जानते हैं एक्सपर्ट टिप्स.
शिवांक द्विवेदी, सतना: खरीफ की फसल अब अपने अंतिम चरण में है और सितंबर का महीना खत्म होते-होते धान की बालियां खेतों में लहलहाने लगी हैं. यही वह वक्त है जब किसानों को अपनी मेहनत का असली फल मिलने वाला है लेकिन यह चरण बेहद संवेदनशील भी माना जाता है. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर किसान इस समय कुछ खास बातों पर ध्यान दें तो पैदावार छप्परफाड़ हो सकती है. वहीं लापरवाही बरतने पर कीट और बीमारियां पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती हैं.
लोकल 18 से बातचीत में किसान और कीटनाशक विशेषज्ञ अमित सिंह ने बताया कि जैसे ही धान में बालियां आने लगती हैं वैसे ही किसान सबसे पहले खेत के चारों ओर मौजूद खरपतवार को हटाएं. खेत की मेड़ पर उगी खरपतवार कीट और बीमारियों का मुख्य स्रोत होती हैं. इन्हीं से कीटों का जीवन चक्र शुरू होता है और धीरे धीरे पूरी फसल पर असर डाल देता है. खरपतवार की सफाई करके किसान अपनी फसल को बड़ी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं.
खेत में पानी का नियंत्रण बेहद जरूरी
धान की फसल में इस समय पैनिकल इनीशिएशन स्टेज शुरू होती है. इस दौरान खेत में 5 से 7 सेंटीमीटर तक पानी बनाए रखना जरूरी है. वहीं जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था है वे अल्टरनेट वेटिंग-ड्राई सिस्टम को अपनाएं. इसमें पहले खेत का पानी पूरी तरह निकाल दिया जाता है और तीन से चार दिन तक पानी दोबारा नहीं लगाया जाता. ध्यान रहे जब खेत में दरारें दिखने लगें तभी दोबारा सिंचाई की जाए. इससे पौधे की जड़ें मजबूत बनती हैं और फसल बेहतर होती है.
पोषक तत्वों का संतुलन बढ़ाएगा चमक और मजबूती
विशेषज्ञ बताते हैं कि जिले के किसान प्रायः पोटाश का उपयोग नहीं करते जबकि इस समय फसल को इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है. अगर किसान घुलनशील 05234 का एक ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें तो धान के दाने मजबूत और चमकदार बनते हैं. इससे न सिर्फ दाने पूर्ण रूप से विकसित होते हैं बल्कि पैदावार भी बढ़ती है.
ब्राउन प्लांट हूपर का बढ़ता खतरा
वर्तमान में सतना और आसपास के क्षेत्रों में धान की फसल पिछले साल से ब्राउन प्लांट हूपर (BPH) रोग से प्रभावित हो रही है. इस रोग में धान के पौधे सूखने लगते हैं और उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होता है. अमित ने बताया कि अगर समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो यह रोग फसल को पूरी तरह चौपट कर सकता है. इसके लिए डोमिनेंट जैसे कीटनाशक प्रभावी साबित हो रहे हैं. यह पौधों के अंदर अवशोषित होकर पत्तियों तक फैलता है और कीटों की रस चूसने की प्रक्रिया को रोक देता है. कुछ ही घंटों में कीट नष्ट हो जाते हैं.
अन्य कीट-बीमारियों से सतर्क रहें
इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों से सतना जिले और आसपास नेक ब्लास्ट या गर्दन तोड़ बीमारी का प्रकोप देखा गया है. यह रोग खासकर बाली निकलने के समय तेजी से फैलता है. इसे रोकने के लिए पाइमेट्रोजिन 50% WG (जैसे सिंजेंटा का चेस) या टेनोफ्यूरान 20% SG (जैसे पीआई की ओसीन या टोकन) जैसे कीटनाशक उपयोगी साबित हो सकते हैं.
इस बार मौसम और बारिश दोनों ही धान की फसल के अनुकूल रहे हैं. यदि किसान इस अंतिम चरण में खरपतवार की सफाई, पानी का संतुलन, पोषक तत्वों की पूर्ति और कीट नियंत्रण पर ध्यान दें तो उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है.
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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