दतिया की खैरी वाली माता बदलती हैं तीन रूप: सुबह, दोपहर और शाम को देती हैं अलग-अलग दर्शन, 400 साल पुराना है मंदिर – datia News

दतिया की खैरी वाली माता बदलती हैं तीन रूप:  सुबह, दोपहर और शाम को देती हैं अलग-अलग दर्शन, 400 साल पुराना है मंदिर – datia News


दतिया में मां पीतांबरा और विजय काली के अलावा एक और देवी हैं, जिन्हें लोग खैरी वाली माता के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि माता दिन में तीन रूप धारण करती हैं—सुबह बाल्यावस्था, दोपहर युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था। यह रूप जीवन के तीन पड़ावों का प्रती

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दतिया से 7 किमी दूर है मंदिर यह मंदिर दतिया मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित है और करीब 400 साल पुराना है। कथा के अनुसार दतिया रियासत के महाराजा वीर सिंह देव को स्वप्न में देवी का आभास हुआ था। माता ने उन्हें संकुआ धाम से निकलकर खैरगढ़ गांव में स्थापित होने का आदेश दिया। खैर के पेड़ों से घिरे इस स्थान का नाम खैरी पड़ा और यहीं से माता को “खैरी वाली माता” कहा जाने लगा।

नवरात्रि में 50 से 60 हजार श्रद्धालु आते हैं नवरात्रि की सप्तमी पर यहां बड़ा मेला लगता है। सुबह से देर रात तक हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। पिछले 25 सालों से सप्तमी पर विशाल भंडारा भी होता है, जिसमें 50 से 60 हजार लोग प्रसादी पाते हैं।

माता के भक्त विशेष नारा लगाते हैं – “सो वेरी और एक खैरी”। मान्यता है कि यदि सौ दुश्मन भी हों, तो माता का नाम लेने से सभी नष्ट हो जाते हैं। भक्तों का कहना है कि तीन रूपों में माता का दर्शन होना अलौकिक अनुभव है, इसलिए श्रद्धालु यहां सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना के लिए पहुंचते हैं।



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