दीवाली से पहले मुआवजा दो, वरना MP-MLA की नो एंट्री: मनासा में कांग्रेस और किसानों ने किया प्रदर्शन, चेतावनी भी दी – Neemuch News

दीवाली से पहले मुआवजा दो, वरना MP-MLA की नो एंट्री:  मनासा में कांग्रेस और किसानों ने किया प्रदर्शन, चेतावनी भी दी – Neemuch News


नीमच जिले के मनासा में बारिश और पीले मोजेक वायरस से खराब हुई सोयाबीन फसलों के उचित मुआवजे की मांग को लेकर आज कांग्रेस और किसानों ने मिलकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के तत्वावधान में बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और मंडी गेट पर धरना दि

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प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि किसानों को दीपावली से पहले मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए। कांग्रेस नेताओं ने सत्ताधारी दल के सांसद और विधायक को सीधा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने एक स्वर में चेतावनी दी कि “यदि दीपावली से पहले किसानों के खातों में मुआवजा राशि नहीं डाली गई, तो गांवों में सांसद-विधायकों की ‘नो एंट्री’ रहेगी।” उपस्थित किसानों ने भी इस चेतावनी का समर्थन करते हुए एकजुटता दिखाई।

‘सरकार भावांतर के नाम पर धोखा दे रही’

धरना प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और किसान खून के आंसू रो रहा है, लेकिन सरकार मुआवजा देने के बजाय भावांतर योजना के नाम पर किसानों को फिर से धोखा देने की कोशिश कर रही है। बाहेती ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसानों की लड़ाई तब तक लड़ेगी जब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल जाता। उन्होंने सरकार से भावांतर की बात बंद कर तुरंत किसानों के खाते में पैसा डालने की मांग की।

विधायक ‘भुट्टा पार्टी’ में व्यस्त: कांग्रेस

जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि आर. सागर कछावा ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब किसान संकट में हैं, तब यहां के विधायक खेतों में जाने की जगह फार्महाउस पर ‘भुट्टा पार्टी’ कर रहे हैं और सांसद-विधायक जीएसटी पर उत्सव मना रहे हैं, जो किसानों का अपमान है। कछावा ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा नेताओं में किसानों के प्रति संवेदना खत्म हो चुकी है।

धरना खत्म होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता किसानों के साथ रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसडीएम किरण आंजना को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मुआवजे के साथ-साथ एमएसपी मूल्य पर ₹6,000 में सोयाबीन खरीदी करने और किसानों का कर्ज माफ करने की भी मांग की गई।



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