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Gandhi Jayanti 2025: महात्मा गांधी सन 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए. ऐसे में वह कई भारत भ्रमण कर लोगों को जगाने का भी काम करते थे. साल 1933 में भारत भ्रमण पर थे. इस दौरान वह मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में भी आए थे. गांधी जयंती के खास मौके पर आज आपको वह किस्सा बता रहे हैं, जब महात्मा गांधी बालाघाट आए थे.
Gandhi Jayanti 2025: आजादी की लड़ाई में दो तरह के लोग थे, एक थे जो सशस्त्र आंदोलन के साथ थे. वहीं, कुछ लोग गांधी के साथ थे, जो अहिंसा के साथ आजादी चाहते थे. महात्मा गांधी सन 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए. ऐसे में वह कई भारत भ्रमण कर लोगों को जगाने का भी काम करते थे. वह सन 1933 में भारत भ्रमण पर थे. इस दौरान वह मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में भी आए थे. गांधी जयंती के खास मौके पर हम आपको वह किस्सा बता रहे हैं, जब गांधी जी बालाघाट आए थे.
इतिहासकार वीरेंद्र सिंह गहरवार के मुताबिक, 28 नंवबर 1933, जब महात्मा गांधी भारत भ्रमण पर थे. ऐसे में वह वर्तमान के महाराष्ट्र के भंडारा और गोंदिया जिला होते हुए बालाघाट आए थे. वह लांजी होते हुए मोहझरी, भानेगांव हिर्री, किरनापुर, रजेगांव और सरेखा से होकर बालाघाट आए थे. उनके स्वागत में हजारों की संख्या में भीड़ इकट्ठा हुई थी. जिस रास्ते वह गुजरे वहां पर हजारों की भीड़ ने उनका स्वागत किया. जगह-जगह पर स्वागत द्वार बनाए गए. इसके साथ ही लोगों ने शहर भर में ध्वज-तोरण लगाए थे.
धान का बोरों का बना था मंच
गांधी जी जब बालाघाट आए थे, तब गांधी लिए जो मंच तैयार किया गया था. वह धान के बोरों का बना हुआ था. ऐसे में गांधी जी ने वहीं से आजादी की लड़ाई में शामिल होने के लिए युवाओं को आह्वान किया था. इसके बाद कई युवा आजादी की लड़ाई में शामिल हुए और आंदोलन की राह चुनी. इसका असर यह हुआ कि बालाघाट जिले से रिकॉर्ड 365 स्वतंत्रता सेनानी हुए, जो मध्य प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले सबसे ज्यादा है.
दूख की बात ये है अब कि जिस मंच से महात्मा गांधी ने भाषण दिया उस धरोहर को सहेजने में आज सभी नाकाम रहे. वहां पर लगे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम के बोर्ड को हटाया गया. अब वहां पर भारत माता की पेंटिंग तो है, लेकिन मंच पर गौमाता का गोबर भी है. फर्श टूट चुकी है और छत जर्जर है.
महिलाओं ने पहने हुए गहने कर दिए थे दान
गांधी जी नारायण केलकर नाम के शख्स के यहां रुके थे. उसी दौरान उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई चलाने के लिए धन की जरूरत पड़ती है. ऐसे में सैकड़ों महिलाओं ने अपने पहने हुए गहनों को उतार कर महिलाओं ने गांधी जी को दिए थे. आपको बता दें, उन्होंने नागरिकों से हरिजन को अछूत न मानने की अपील की. अपनी भारत यात्रा के तहत गांधी जी बालाघाट शहर के बाद वारासिवनी गए और वहां से होते हुए सिवनी की ओर चले गए.
Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
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