जबलपुर में रविवार को राष्ट्र सेविका समिति की महाकौशल प्रांत इकाई ने पथ संचलन निकाला। विजयनगर विभाग में आयोजित इस संचलन में सात नगरों की लगभग 150 महिलाओं ने हिस्सा लिया। यह आयोजन समिति के स्थापना दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने के उद्
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राष्ट्र सेविका समिति के लिए विजयादशमी का दिन विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1936 में इसी दिन वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) ने वर्धा में इसकी स्थापना की थी। ‘स्त्री राष्ट्र की आधारशीला है’ के ध्येय वाक्य के साथ यह संगठन आज विश्व का सबसे बड़ा महिला संगठन है, जो नारी को सशक्त बनाने के साथ-साथ राष्ट्र के सांस्कृतिक और पारिवारिक मूल्यों की रक्षा का कार्य भी करता है।
विजयनगर विभाग में आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व महाकौशल प्रांत की कार्यवाहिका सुमेधा पोल ने किया। पथ संचलन का आरंभ विजयनगर से हुआ, जो अहिंसा चौक और एकता चौक जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस अपने आरंभिक स्थल पर समाप्त हुआ। पूरी यात्रा के दौरान महिलाओं का अनुशासन और राष्ट्रप्रेम स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, सेविकाओं ने घोष वादन के साथ कदमताल किया।
संचलन के दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर सेविकाओं का स्वागत किया। इस अवसर पर महिलाओं ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्रभक्ति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया।
जबलपुर में रविवार को राष्ट्र सेविका समिति की महाकौशल प्रांत इकाई ने पथ संचलन निकाला।
संस्कार और समरसता पर जोर दिया
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित बौद्धिक में सुमेधा पोल ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति स्त्रीवाद नहीं, बल्कि परिवार निर्माण, मातृत्व कर्तव्य और सशक्त नेतृत्व को पल्लवित करने वाला संगठन है। उन्होंने संस्कारों की रक्षा और सामाजिक समरसता के लिए कार्य करने पर जोर दिया।
सुमेधा पोल ने बताया कि सेविकाएं अपनी नित्य और साप्ताहिक शाखाओं के माध्यम से शारीरिक शिक्षा, बौद्धिक विकास और मनोबल बढ़ाने का कार्य लगातार करती रहेंगी, ताकि राष्ट्र निर्माण में नारी शक्ति का योगदान सुनिश्चित हो सके।

पथ संचलन में सात नगरों की लगभग 150 महिलाओं ने हिस्सा लिया।