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Balaghat News: तमिलनाडु सरकार के ड्रग्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने जांच की. श्रीसन कंपनी कांचीपुरम यूनिट में हुई जांच में पता चला कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप में 48.6 प्रतिशत तक डाईथाइलीन ग्लॉयकाल मिला है, जो एक तरह का जहरीला केमिकल है.
बालाघाट. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और राजस्थान में बच्चों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है. छिंदवाड़ा के परासिया में वायरल फीवर से ग्रसित बच्चे लगातार अस्पताल आ रहे थे. जो बच्चों संक्रमित थे, उन्हें तेज बुखार और पेशाब करने में कठिनाई हुई. पहला मामला 24 अगस्त को सामने आया था और पहली मौत 7 सितंबर को हुई थी. ऐसे में बच्चों की मौत कैसे हुई, यह किसी को समझ नहीं आया. फिर देखा गया कि उनकी मौत में एक बात थी , जो समान थी और वह है किडनी फेल होना. इसके पीछे के कारणों में पता चला कि डाईथाइलीन ग्लॉयकाल केमिकल में गड़बड़ी है. ऐसे में ये दो तरह के कफ सीरप पर शक गया, इसमें कोल्ड्रिफ (Coldrif) और नेक्सट्रॉ डीएस (Nextro-DS) शामिल थे.
11 मौतों के बाद केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र ने जांच तेज कर दी है और पांच सदस्यों की टीम गठित की है. ऐसे में जब मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है, बालाघाट का स्वास्थ्य महकमा इस पूरे मामले में लापरवाह नजर आ रहा है. स्थिति यह है कि जिले के स्वास्थ्य विभाग के पास कोल्ड्रिफ और नेक्सट्रॉ डीएस सीरप के स्टॉक से जुड़ी कोई स्पष्ट जानकारी तक उपलब्ध नहीं है. इससे विभाग की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. आपको बता दें कि बालाघाट के ड्रग्स इंस्पेक्टर स्वप्निल सिंह छिंदवाड़ा में हुए मामले में जांच दल में शामिल हुए हैं.
बच्चों की मौत के बढ़ते मामलों के बाद प्रशासन एक्शन में आया और दोनों संदिग्ध कफ सीरप की बिक्री पर बैन लगाया गया है. जिस कंपनी की दवा से पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है, वह दवा बालाघाट में बिक रही थी. बालाघाट में भी एक अक्टूबर को एडवाइजरी जारी हुई और कोल्ड्रिफ और नेक्सट्रॉ डीएस की बिक्री पर रोक लगा दी गई. यानी साफ है कि ये दवाएं एक अक्टूबर से पहले तक बिक रही थीं. हालांकि छिंदवाड़ा में जिस तरह के मामले सामने आए, वैसा मामला बालाघाट में अब तक सामने नहीं आया है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.