Get Rid Your Pet Of Lice And Ticks: पालतू पशुओं में जूं और चिचड़ी लगना एक आम समस्या है, खासकर बरसात के मौसम के बाद ज्यादा रहती है. ये परजीवी न केवल पशुओं को परेशान करते हैं, बल्कि उनकी त्वचा पर घाव भी कर सकते हैं और कई बार तो संक्रमण भी फैला सकते हैं. पशु बार-बार खुद को खुजलाते हैं, बेचैन रहते हैं और उनका खान-पान तक प्रभावित हो जाता है। इसके चलते उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और दुग्ध उत्पादन या कार्यक्षमता में भी गिरावट आ सकती है.
नीम का तेल
नीम एक बेहतरीन प्राकृतिक कीट-नाशक है. नीम के तेल को थोड़ा पानी में मिलाकर स्प्रे की बोतल में भर लें और रोजाना पशु की त्वचा और बालों पर छिड़कें. इससे जूं और चिचड़ी भागने लगती हैं. नीम की खुशबू और इसके तत्व इन कीटों को मारते भी हैं और दोबारा आने से रोकते हैं.
सरसों का तेल और हल्दी का लेप
सरसों के तेल में हल्दी मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और इसे पशु की त्वचा पर लगाएं. हल्दी एंटीसेप्टिक होती है और सरसों का तेल कीड़ों को भगाने में मदद करता है. ये लेप त्वचा के घावों को भी भरता है और खुजली से राहत देता है.
राख और नीम की सूखी पत्तियां
गांवों में यह नुस्खा काफी प्रचलित है. नीम की सूखी पत्तियों को जलाकर बनी राख को पशुओं की पीठ, गर्दन और पूंछ के पास हल्के से रगड़ें. यह चिचड़ी और जूं को दूर भगाने में कारगर है. इसके साथ ही यह तरीका पूरी तरह से प्राकृतिक और सुरक्षित होता है।
सिरका और पानी का मिश्रण
एक भाग सफेद सिरका और दो भाग पानी को मिलाकर पशु की त्वचा पर लगाएं. इसका तेज गंध जूं और चिचड़ी को दूर भगा देता है और इसे सप्ताह में 2-3 बार उपयोग में लाया जा सकता है.
आंवला और रीठा का पानी
आंवला और रीठा को पानी में उबालें और ठंडा होने पर पशु के शरीर पर नहलाएं. ये दोनों सामग्रियां बालों को साफ करती हैं और त्वचा पर लगे कीटों को मारती हैं. इससे पशु को ठंडक भी मिलती है और बाल मुलायम होते हैं.
रोजाना सफाई और धूप सेंकना
पशुओं को साफ-सुथरे वातावरण में रखना सबसे जरूरी है. रोजाना उनके बाड़े की सफाई करें और उन्हें सुबह की धूप में कुछ समय रखें. धूप में कीट मर जाते हैं और नमी भी खत्म हो जाती है जो कि चिचड़ी और जूं के फैलाव की वजह बनती है.
निष्कर्ष
पालतू पशुओं की देखभाल में थोड़ा ध्यान और समय देने से आप उन्हें जूं और चिचड़ी जैसी परेशानियों से आसानी से बचा सकते हैं. ये घरेलू नुस्खे न केवल कारगर हैं, बल्कि सस्ते और रसायन-मुक्त भी हैं. किसान राकेश पटेल जैसे अनुभवी पशुपालकों की मानें तो अगर ये उपाय नियमित रूप से किए जाएं, तो पशु सालभर स्वस्थ और प्रसन्न रहते हैं. इसलिए, अगली बार जब आपके पशु बेचैन नजर आएं या खुजलाते दिखें, तो बाजार की महंगी दवाइयों की बजाय पहले इन घरेलू नुस्खों को जरूर आजमाएं.