दुबई में बढ़िया नौकरी क्या लगी, पिता को भूला बेटा, बुजुर्ग से पूछा तो रोने लगे

दुबई में बढ़िया नौकरी क्या लगी, पिता को भूला बेटा, बुजुर्ग से पूछा तो रोने लगे


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Jabalpur News: उनके परिवार में सिर्फ बेटा है, जिससे आस थी लेकिन जिस बेटे को पढ़ाया-लिखाया, आज वही बेटा दुबई की एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता है लेकिन उनकी कोई सुध नहीं लेता.

जबलपुर. किसी ने क्या खूब कहा है, ‘न कोई कीमत मेरी…न कोई दर्जा मेरा, उड़ गया परिंदा छोड़कर बसेरा.’ आज कहानी उस बुजुर्ग पिता की, जिसने अपने बेटे को पढ़ाया-लिखाया और दुबई की मल्टीनेशनल कंपनी तक पहुंचाया. आज वही बेटा अपने पिता को याद तक नहीं करता. लिहाजा अब 85 साल के बुजुर्ग पिता वृद्धाश्रम में एक-एक पल बेटे की याद में काट रहे हैं. जबलपुर के वृद्धाश्रम में 85 साल के टोनी जोसेफ की दास्तां झकझोरने वाली है. टोनी ने लोकल 18 को आपबीती सुनाते हुए कहा, ‘खून से लथपथ हैं उंगलियां मेरी….शीशे के टुकड़े को हाथ से उठाने की सजा मिली है.’

बुजुर्ग का यह दर्द तब झलक उठता है, जब भी उनसे उनके परिवार के लोगों के बारे में पूछा जाता है. उन्होंने कहा कि आज उनके परिवार में कोई भी नहीं है, जिसके चलते वृद्धाश्रम में रहना पड़ रहा है. पत्नी का निधन 50 साल पहले हो चुका था. परिवार में मां थीं, वह भी शांत हो गईं जबकि बहन की कोरोना काल में मृत्यु हो गई. परिवार में सिर्फ बेटा है, जिससे उम्मीद थी लेकिन जिस बेटे को पढ़ाया-लिखाया, आज वही बेटा दुबई की एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करता है लेकिन उनकी कोई सुध नहीं लेता.

दिल्ली में बेटे को पढ़ाया-लिखाया
टोनी जोसेफ बताते हैं कि बुढ़ापे से पहले वह व्यापार करते थे. नौकरी आज तक नहीं की. व्यापार की बदौलत बेटे को अच्छी शिक्षा दिलाई. उन्होंने बेटे को दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज में पढ़ाया था. बेटा पढ़ने में होशियार था, इसलिए दुबई की एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी भी लग गई. जैसे ही नौकरी लगी, बेटे ने संपर्क ही छोड़ दिया. उसके बाद से आज तक बेटे से मुलाकात नहीं हो पाई. उन्होंने कहा कि बेटे से उम्मीद थी कि बुढ़ापे में सहारा बनेगा लेकिन बहुत तकलीफ होती है, जब एक बेटा भले ही अपने पिता को साथ न रखें लेकिन उनका बेटा तो उनसे बात भी नहीं करता, सुध भी नहीं लेता.

दिल का हो चुका है ऑपरेशन
उन्होंने आगे कहा कि कुछ ही समय पहले उनका हार्ट का ऑपरेशन हुआ था. मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया था, तब डॉक्टर ने पूछा था कि उनके परिवार में कौन-कौन है. यह सुन वह असहज हो गए थे और उनकी आंखों से आंसू आ गए. इसके बाद डॉक्टर की टीम ने दिल का ऑपरेशन किया और उन्हें वृद्धाश्रम तक पहुंचाया. आज वह वृद्धाश्रम में रहकर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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