मऊगंज जिले के किसानों ने सोमवार शाम कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने अधूरी सिंचाई योजना, फसल बीमा में अनियमितता और खाद संकट को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। नईगढ़ी और मऊगंज क्षेत्र के सैकड़ों किसान ट्रैक्टर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पह
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राष्ट्रीय किसान संगठन के जिला अध्यक्ष भाग्योदय नाथ नारायण प्रताप सिंह सेंगर ने बताया कि वर्ष 2018 में 856 करोड़ रुपए की भूमिगत जल सिंचाई परियोजना शुरू की गई थी। इसे वर्ष 2020 तक पूरा होना था, लेकिन यह अब तक अधूरी है, जिससे किसानों को कोई लाभ नहीं मिल सका। संगठन ने आरोप लगाया कि जे.पी. एसोसिएट और ए.डी. सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनियों की लापरवाही और सरकारी मिलीभगत के कारण योजना की लागत दोगुनी हो गई, जबकि किसानों के खेत अब भी सूखे हैं।
चेतावनी देते हुए बोले-जिले में व्यापक आंदोलन किया जाएगा
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि खरीफ 2026 तक खेतों तक सिंचाई की सुविधा नहीं पहुंची, तो मऊगंज जिले में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। किसानों ने कहा कि सरकार और ठेकेदार मिलकर जनता के टैक्स के पैसे की लूट कर रहे हैं।
किसानों ने फसलों के औसत उत्पादन में गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में धान का औसत उत्पादन 24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज है, जबकि वास्तविक उत्पादन 50 क्विंटल तक होता है। गलत आंकड़े दर्ज होने से किसानों को खरीदी और मुआवजा दोनों में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान बोले- नष्ट फसलों का सर्वे नहीं किया गया
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर भी किसानों ने गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उन्हें यह तक नहीं पता कि उनकी फसल बीमा किस कंपनी ने की है और क्लेम की प्रक्रिया क्या है। सितंबर-अक्टूबर की बारिश से फसलें नष्ट हुईं, लेकिन सर्वे तक नहीं किया गया। संगठन का आरोप है कि यह योजना किसानों की नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों की आय बढ़ाने का साधन बन गई है।
इसके साथ ही, किसानों ने भावांतर योजना को ‘व्यापारी हितैषी’ बताते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी देने की मांग की। बिजली विभाग पर अवैध वसूली और खाद वितरण में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए गए। संगठन ने कहा कि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो मऊगंज में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।