अफ्रीकी टेक्नीक से काले हिरण, नीलगाय को गांधीसागर भेजेंगे: चारों ओर नेट लगाकर हेलिकॉप्टर से हांका जाएगा, – shajapur (MP) News

अफ्रीकी टेक्नीक से काले हिरण, नीलगाय को गांधीसागर भेजेंगे:  चारों ओर नेट लगाकर हेलिकॉप्टर से हांका जाएगा, – shajapur (MP) News


मध्य प्रदेश में पहली बार दक्षिण अफ्रीका की ‘बोमा टेक्नीक’ से ब्लैक बक और नीलगाय को शाजापुर से मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य भेजा जा रहा है। यह पहली बार होगा जब इस तकनीक से काले हिरणों का राजस्व क्षेत्र से रेस्क्यू किया जाएगा। फिलहाल, 400 ब्लैक बक और 1

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डीएफओ हेमलता शाह ने बताया कि इस प्रक्रिया में एक्सपर्ट की टीम बिना किसी वन्य जीव को नुकसान पहुंचाए, सिर्फ 21 दिन में वन्यजीवों को ट्रांसलोकेट कर देगी।

बता दें कि हाल में श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क से दो चीते गांधीसागर अभयारण्य में छोड़े गए थे। पकड़े जाने वाले हिरणों और नीलगायों को मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य में शिफ्ट किया जाएगा। उनके प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इन प्रजातियों को लाया जा रहा है। पढ़िए रिपोर्ट…

शाजापुर में नीलगाय और काले हिरण खेतों में फसल को नष्ट कर देते हैं।

पहले जानिए, स्थानांतरण की जरूरत क्यों

शाजापुर में 20 हजार काले हिरण और 2 हजार नीलगाय

शाजापुर जिले में वन विभाग की भूमि न होने के बावजूद काले हिरण और नीलगायों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वर्तमान में जिले में करीब 20 हजार काले हिरण और दो हजार नीलगाय हैं। ये फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसान लंबे समय से परेशान हैं। ये वन्य जीव खेतों में घुसकर फसल नष्ट कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक काला हिरण करीब 40-50 हिरण के समूह का लीडर होता है।

साल 2022 में तत्कालीन स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया था। किसानों की मांग पर वन विभाग ने इन्हें पकड़कर अन्य सुरक्षित क्षेत्रों में भेजने की योजना तैयार की। शुरुआती चरण में केंद्र सरकार से 400 काले हिरण और 100 नीलगायों को रेस्क्यू करने की अनुमति मिली है।

17 सदस्यीय अफ्रीकी टीम करेगी शुरुआत

वन विभाग के अफसरों के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका की 15 से 17 विशेषज्ञों की टीम मंगलवार को शाजापुर पहुंचेगी। 15 अक्टूबर से कालापीपल क्षेत्र से अभियान की शुरुआत की जाएगी। अफ्रीका से बोमा बनाने की सामग्री करीब डेढ़ साल पहले ही मंगवाई जा चुकी है। इस बार अभियान को मूर्तरूप देने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

बोमा पद्धति में अंग्रेजी की V आकार में बाड़ बनाई जाती है, जिसे बोमा कहा जाता है। (फाइल फोटो)

बोमा पद्धति में अंग्रेजी की V आकार में बाड़ बनाई जाती है, जिसे बोमा कहा जाता है। (फाइल फोटो)

अब जानिए बोमा पद्धति के बारे में …

क्या है बोमा पद्धति?

दरअसल, बोमा पद्धति में वन्यजीवों को बिना नुकसान पहुंचाए नियंत्रित क्षेत्र में एकत्र किया जाता है। इसके लिए एक प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसे बोमा कहा जाता है। इसमें वन्य जीव को बिना केमिकल इंजेक्शन लगाए खुले मैदानों या खेतों में हेलीकॉप्टर की मदद से हांक कर पहले से बनी घास और हरी नेट की दीवारों (बोमा) के घेरे में लाया जाता है। इन जानवरों को हांक कर विशेष वाहनों तक जाया जाएगा। इनके माध्यम से सुरक्षित रूप से ट्रांसलोकेट किया जाता है। इस प्रक्रिया में इंसानों का सीधा संपर्क नहीं होता, जिससे जानवर भी तनावमुक्त रहते हैं।

रॉबिन्सन आर-44 हेलीकॉप्टर का करेंगे उपयोग

इस तकनीक में रॉबिन्सन सिंगल इंजन लाइट वेट हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाएगा। यह 200 किमी प्रतिघंटे की स्पीड से उड़कर 500 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। कई देशों में वन्यजीवों के ट्रांसलोकेशन के लिए उपयोग किया जाता है। अफ्रीका की टीम इसकी मदद से हजारों वन्य जीवों का सफल ट्रांसलोकेशन कर चुकी है।

एरियल हेरडिंग तकनीक का भी उपयोग

अभियान में अफ्रीकी टीम एरियल हेरडिंग तकनीक का भी उपयोग करेगी। इसके तहत हेलीकॉप्टर से वन्यजीवों की लोकेशन देखी जाएगी। दूरी बनाते हुए उन्हें घेरकर निर्धारित क्षेत्र की ओर हांक दिया जाएगा। इस तकनीक को एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) ने अप्रूवल दिया हुआ है।

गांव वालों के साथ वन विभाग कर्मचारी कर रहे बैठक

अभियान के तहत विभाग की टीम क्षेत्र के गांवों में किसानों के साथ निरंतर बैठक कर रही है। इमलीखेड़ा में प्रथम चरण में जेठड़ा, डुंगलाय दूसरे चरण व पोलायकलां तहसील के उमरसिंगी में तीसरा चरण होगा। ग्रामीणों के साथ एसडीओ फतेहसिंह मिनामा, रेजर रतनसिंह, डिप्टी रेंजर राजेश जावरिया, कन्हैयालाल, वनरक्षक हरीश सक्सेना, प्रदीप विश्वकर्मा संवाद कर रहे हैं। इस दौरान गांव वालों को ट्रांसलोकेशन के बारे में बताया जा रहा है।

टीम तय करेगी स्थान

वन विभाग ने क्षेत्र में हिरणों को रेस्क्यू करने के लिए जो प्लान तैयार किया है, उसके तहत कालापीपल क्षेत्र के इमलीखेड़ा में हेलिकॉप्टर उतरने के लिए हेलीपेड तैयार हैं। 10 स्थान और चिह्नित किए हैं, जहां हेलिकॉप्टर को उतारा जा सके। हालांकि इन स्थानों को अफ्रीका से आने वाले टीम के निरीक्षण के बाद फाइनल किया जाएगा।



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