Shani Pradosh Vrat 2025: कार्तिक मास का पहला प्रदोष व्रत कब? इस चालीसा का करें पाठ, आचार्य से जानें सही डेट

Shani Pradosh Vrat 2025: कार्तिक मास का पहला प्रदोष व्रत कब? इस चालीसा का करें पाठ, आचार्य से जानें सही डेट


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Shani Pradosh Vrat 2025 Date: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को शनि प्रदोष व्रत है. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. इस व्रत के बारे में विस्तार से आइए उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से जानते हैं.

Shani Pradosh Vrat 2025 Date: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. इस खास दिन पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा से सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. दरअसल, एक महीने में 2 बार प्रदोष व्रत किया जाता है. इस दिन सुबह से लेकर शाम तक व्रत किया जाता है और भगवान शिव समेत उनके पूरे परिवार की आराधना की जाती है. साथ ही, विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. आइए जानते हैं, उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से अक्टूबर के महीने में अंतिम प्रदोष व्रत कब है और इसका धार्मिक महत्व क्या है.

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष का पहला प्रदोष व्रत और अक्टूबर का अंतिम प्रदोष व्रत 18 अक्टूबर को है. यह प्रदोष व्रत बेहद खास है क्योंकि इस दिन धनत्रयोदशी का भी संयोग बना है. यानी इस दिन प्रदोष व्रत करने से प्रदोष के साथ ही साथ धनतेरस व्रत का भी पुण्य प्राप्त होगा. इस दिन त्रयोदशी तिथि दिन में 12 बजकर 20 मिनट पर लगेगी और त्रयोदशी तिथि 19 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 50 मिनट तक व्याप्त होगी. जबकि धनतेरस के दिन प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ समय शाम में 5 बजकर 50 मिनट से शाम 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगा.

क्या है शनि प्रदोष व्रत का महत्व?
मान्यता है कि यह व्रत करने से शनि के बुरे प्रभाव से बचाव होता है. इस व्रत को करने से भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. इसलिए इस दिन प्रदोष व्रत का लाभ उठाएं और भगवान शिव और शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करें. ऐसा करने से आपको शिव और शनि की कृपा प्राप्‍त होगी. शनि प्रदोष व्रत एक खास मौका है जब आप अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं. इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से विशेष फल मिलता है.

जरूर करें इन नियमों का पालन
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्य देव को अर्घ देकर व्रत का संकल्प लें.

इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें.

पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. इसके बाद ही अपना उपवास खोलें.

Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

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