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Magistrate Hanuman Temple of Shivpuri: मंदिर के महंत रामनरेश त्रिपाठी बताते है कि यहां अनेक छोटे-बड़े विवादों का निपटारा हुआ है. लोग आपसी कलह, जमीन के झगड़े, पारिवारिक मतभेद और चोरी के मामलों में यहां कसम खाकर सच्चाई जानने का निर्णय लेते है. कसम के बाद लोग अपनी गलतियों को स्वीकार कर लेते हैं. जिससे विवाद वहीं समाप्त हो जाते हैं. इसी कारण इस मंदिर पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है.
Shivpuri Hanuman Temple: शिवपुरी जिले के खनियाधाना तहसील में स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर है. जिसे मजिस्ट्रेट हनुमान के नाम से जाना जाता है. आज पूरे इलाके में आस्था और न्याय का प्रतीक बन गया है. यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है और यहां लोग अपने विवाद, समस्याएं और मनोकामनाएं लेकर आते हैं. जिन्हें एक निश्चित समय सीमा में समाधान मिलने की मान्यता है.
कहानी के अनुसार जब इस हनुमान प्रतिमा को पुराने हाई स्कूल के पास स्थापित करने ले जाया जा रहा था तो बैलगाड़ी टेकरी चढ़ते ही रुक गई और प्रतिमा वहीं स्थापित कर दी गई. स्थानीय बुजुर्ग बताते है कि उसी समय दतिया जिले के बसई गांव की टेकरी हनुमान की प्रतिमा भी लाई गई थी, जिससे दोनों स्थानों की मान्यता एक दूसरे से जुड़ी है.
मजिस्ट्रेट हनुमान के मंदिर की विशेषता यहां अपनाई जाने वाली न्याय-परंपरा है. किसी विवाद, चोरी-झगड़े या आरोप के मामले में लोग यहां कसम खाकर सच-झूठ का निर्णय कराते है. प्रक्रिया स्पष्ट है आरोपित व्यक्ति को 7 दिन या तय समय की अवधि मिलती है, जिसके दौरान अगर कोई अनहोनी होती है, तो उसे दोषी माना जाता है और अगर समय बिना किसी परेशानी के बीतता है, तो उसे निर्दोष समझा जाता है. कसम के दौरान 2 से 4 लोग उपस्थित रहते हैं जो समय सीमा और निर्णय को मान्यता देते है.
मंदिर के महंत रामनरेश त्रिपाठी बताते है कि यहां अनेक छोटे-बड़े विवादों का निपटारा हुआ है. लोग आपसी कलह, जमीन के झगड़े, पारिवारिक मतभेद और चोरी के मामलों में यहां कसम खाकर सच्चाई जानने का निर्णय लेते है. कसम के बाद लोग अपनी गलतियों को स्वीकार कर लेते हैं. जिससे विवाद वहीं समाप्त हो जाते हैं. इसी कारण इस मंदिर पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां आकर उन्हें न्याय का अनुभव होता है, जो बिना किसी दबाव या पक्षपात के मिलता है. कोई कागजी प्रक्रिया नहीं, बस भगवान के सामने सच बोलने की हिम्मत और भरोसा. यही कारण है कि दूर-दूर से लोग यहां अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं. समय के साथ अनेक मान्यताएं बदल जाती है. लेकिन खनियाधाना के मजिस्ट्रेट हनुमान मंदिर की यह परंपरा आज भी लोगों के जीवन में न्याय और आस्था का अद्भुत संगम बनी हुई है.