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MP High Court News: मध्य प्रदेश में प्रमोश में आरक्षण के विवाद की फाइनल सुनवाई हाईकोर्ट ने शुरू कर दी है. सुनवाई के दौरान सरकार ने स्पष्टीकरण दिया, लेकिन अंतरिम राहत नहीं मिली.
रिपोर्ट: पवन पटेल
DPC गठन की मांग ठुकराई
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्टीकरण देते हुए बताया, नई प्रमोशन पॉलिसी केवल वर्ष 2016 के बाद के प्रमोशन पर लागू होगी. 2016 से पहले हुए प्रमोशन पुरानी पॉलिसी के दायरे में रहेंगे. सरकार के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी कि नई नीति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है, जिसमें क्रीमी लेयर व क्वांटिफायबल डेटा का प्रावधान जोड़ा गया है. उन्होंने DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) गठित कर प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया.
सीलबंद लिफाफे में आंकड़ों का क्वांटिफायबल डेटा दें
याचिकाकर्ताओं, जिनमें डॉ. स्वाति तिवारी व सपाक्स संघ शामिल हैं, ने आपत्ति जताई कि पुरानी पॉलिसी सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के बावजूद नई नीति क्यों लाई गई. उन्होंने क्वांटिफायबल डेटा की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए. कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि यदि आवश्यक हो तो सीलबंद लिफाफे में आंकड़ों का क्वांटिफायबल डेटा प्रस्तुत किया जाए.
अगली सुनवाई 28 व 29 अक्टूबर को
यह मामला वर्ष 2002 के नियमों से जुड़ा है, जो आरबी राय केस में रद्द हो चुके हैं, फिर भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती लंबित है. 2016 से प्रमोशन रुके होने से एक लाख से अधिक कर्मचारी प्रभावित हुए हैं. कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 व 29 अक्टूबर को निर्धारित की, तब तक नई पॉलिसी पर रोक बरकरार रहेगी. यह फैसला सामाजिक न्याय व प्रशासनिक दक्षता के बीच संतुलन स्थापित करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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