दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और मिठास का प्रतीक है. इस पर्व पर बाजारों में रौनक देखते ही बनती है. हर गली, हर मोहल्ले में मिठाइयों की दुकानें सजी रहती हैं. इन दिनों सबसे ज्यादा बिकने वाली मिठाइयों में सोनपापड़ी का नाम सबसे ऊपर है. इसकी परतदार बनावट, मुंह में घुल जाने वाला स्वाद और लंबे समय तक खराब न होने की क्षमता के कारण लोग इसे दिवाली पर उपहार में देना भी पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में बिकने वाली यही सोनपापड़ी कई बार नकली घी से भी तैयार की जाती है? जिससे इसका स्वाद तो वही रहता है, लेकिन यह सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है.
नकली घी से बनी मिठाई के नुकसान
नकली या सिंथेटिक घी पेट में भारीपन, गैस, अपच और कई बार फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. इसमें मौजूद केमिकल्स लिवर और किडनी पर बुरा असर डालते हैं. लगातार सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.
कैसे करें असली और नकली सोनपापड़ी की पहचान
हलवाई दीपक बताते हैं कि असली सोनपापड़ी की खुशबू हल्की और प्राकृतिक होती है. जब इसे तोड़ा जाता है तो इसमें से घी की हल्की परत निकलती है और मिठाई टूटते ही बारीक तंतु जैसे रेशे बनते हैं. वहीं नकली घी से बनी सोनपापड़ी ज्यादा चमकदार दिखती है, लेकिन उसकी खुशबू तेज और कृत्रिम होती है.
1. खुशबू से पहचानें: असली घी की महक हल्की और देसी होती है, जबकि नकली घी से बनी मिठाई में तेज़, कृत्रिम सुगंध आती है.
2. स्पर्श से पहचानें: असली सोनपापड़ी हाथ में लेने पर हल्की चिकनाई छोड़ती है, परंतु चिपचिपी नहीं होती. नकली घी वाली मिठाई हाथ में चिपक जाती है.
3. स्वाद से पहचानें: शुद्ध घी वाली सोनपापड़ी मुंह में जाते ही घुल जाती है, जबकि नकली घी वाली देर तक चबानी पड़ती है और स्वाद में हल्की कड़वाहट छोड़ जाती है.
4. कीमत से समझें संकेत: अगर बाजार में बहुत सस्ती सोनपापड़ी मिल रही है तो समझ लीजिए उसमें कुछ गड़बड़ जरूर है, क्योंकि शुद्ध घी महंगा होता है.
भरोसेमंद दुकानों से ही खरीदें
खंडवा के मिठाई व्यापारी बताते हैं कि ग्राहकों को हमेशा उन्हीं दुकानों से मिठाई लेनी चाहिए जहां मिठाई बनते हुए देखी जा सके या जहां FSSAI प्रमाणित दुकान हो. साथ ही, खुले में रखी मिठाई की बजाय पैक की हुई मिठाई लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है.
घर पर भी बना सकते हैं शुद्ध सोनपापड़ी
अगर आप पूरी तरह सुरक्षित मिठाई चाहते हैं, तो सोनपापड़ी घर पर भी बनाई जा सकती है. इसके लिए देसी घी, बेसन, चीनी, पानी और इलायची पाउडर की जरूरत होती है. हलवाई दीपक के अनुसार, “थोड़ी मेहनत से बनी घर की सोनपापड़ी न सिर्फ स्वादिष्ट होती है बल्कि शुद्ध भी होती है. इसमें न कोई मिलावट होती है और न ही स्वास्थ्य का खतरा.
नकली घी की पहचान कैसे करें
यदि आप घी खरीदते समय उसकी गुणवत्ता जांचना चाहते हैं, तो एक आसान तरीका है
एक चम्मच घी को छोटे बर्तन में डालकर गर्म करें. असली घी गर्म होने पर तुरंत पिघल जाता है और उसमें से हल्की सुगंध आती है. नकली घी को गर्म करने पर उसमें से धुआं निकलता है और गंध तेज, रासायनिक जैसी होती है. इसके अलावा, असली घी को ठंडे वातावरण में रखने पर वह हल्का जम जाता है, जबकि नकली घी लंबे समय तक तरल रूप में रहता है.
उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी
दिवाली जैसे त्योहारों में मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है. ऐसे में नकली उत्पाद बाजार में बड़ी मात्रा में आते हैं. इसलिए ग्राहकों को सतर्क रहना जरूरी है. मिठाई खरीदते समय अगर शक हो, तो पहले कम मात्रा में खरीदें और स्वाद या गंध से जांच करें.
खंडवा के हलवाई दीपक कहते हैं कि मिठास तो त्योहार की शान है, लेकिन सेहत उससे कहीं ज्यादा जरूरी है. थोड़ी सावधानी आपको नकली घी से बने मीठे जहर से बचा सकती है.
अंत में याद रखें असली मिठास वही है जो स्वाद और सेहत दोनों में खरा उतरे. इसलिए इस दिवाली मिठाई खरीदते समय सजग रहें, ताकि त्योहार की खुशियाँ बरकरार रहें और मिठास सेहतमंद हो.