कहीं सिगड़ी तो कहीं लकड़ी के चूल्हे बने सहारा, बैचलर्स-स्टूडेंट्स की बढ़ी परेशानी

कहीं सिगड़ी तो कहीं लकड़ी के चूल्हे बने सहारा, बैचलर्स-स्टूडेंट्स की बढ़ी परेशानी


Last Updated:

Gas Cylinder Shortage Impact on Indore: इंदौर में गैस सिलेंडर की बुकिंग से जुड़े नए नियमों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण शहर के कई छोटे रेस्टोरेंट और भोजनालय मुश्किल में आ गए हैं. कई दुकानदारों को गैस नहीं मिलने के कारण लकड़ी के चूल्हे, सिगड़ी और इंडक्शन पर खाना बनाना पड़ रहा है. व्यापारियों का कहना है कि पहले जहां 24 घंटे में सिलेंडर मिल जाता था, अब लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. अगर जल्द ही गैस की समस्या हल नहीं हुई तो कई रेस्टोरेंट और भोजनालय बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं.

Indore News: इंदौर में गैस सिलेंडर की बुकिंग को लेकर बने नए नियमों का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है. खासकर कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों ने शहर के खान-पान कारोबार की कमर तोड़ दी है. हालात ऐसे हो गए हैं कि कई छोटे भोजनालय और मध्यम वर्गीय रेस्टोरेंट अब बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं. कई दुकानदारों को मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे, सिगड़ी और इंडक्शन का सहारा लेना पड़ रहा है ताकि किसी तरह कारोबार चलता रहे.

सिलेंडर नहीं मिला तो बंद करनी पड़ रही दुकानें
रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी कमर्शियल सिलेंडर की कमी से हो रही है. पहले जहां गैस की बुकिंग के 24 घंटे के भीतर सिलेंडर मिल जाता था, अब कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है. कुछ दुकानों में भीड़ ज्यादा रहती है, लेकिन गैस न मिलने के कारण उन्हें दुकान बंद करनी पड़ रही है. व्यापारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो उन्हें अनिश्चितकाल के लिए अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है.

ब्लैक में 4 हजार तक पहुंची कीमत
व्यापारियों का कहना है कि गैस एजेंसी से समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा. वहीं ब्लैक में भी सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं है. अगर कहीं से मिल भी रहा है तो उसकी कीमत करीब 4 हजार रुपये तक मांगी जा रही है, जो छोटे कारोबारियों के लिए बहुत ज्यादा है.

गैस चूल्हा छोड़ सिगड़ी पर बन रहा खाना
शहर के एक छोटे भोजनालय संचालक विशाल मेहता बताते हैं कि पिछले चार दिनों से उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया है. मजबूरी में उन्होंने करीब 3 हजार रुपये खर्च करके नई सिगड़ी बनवाई. अब उसी पर खाना बनाना पड़ रहा है, लेकिन इससे खाना धीरे बनता है और काम भी ज्यादा मुश्किल हो गया है. उनका कहना है कि अगर जल्द गैस नहीं मिली तो उन्हें अपना भोजनालय बंद करना पड़ सकता है.

दूध के कड़ाव भी पड़े ठंडे
इस संकट का असर इंदौर के मशहूर दूध के कड़ाव पर भी दिखाई देने लगा है. दुकानदारों का कहना है कि दूध को गाढ़ा करने के लिए 4 से 5 घंटे तक लगातार गैस जलानी पड़ती है. लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कई दुकानों में पिछले चार दिनों से दूध के कड़ाव बंद पड़े हैं, जिससे ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

बैचलर्स और छात्रों पर भी पड़ा असर
इस समस्या का सबसे ज्यादा असर उन इलाकों में देखने को मिल रहा है जहां बैचलर्स और विद्यार्थी ज्यादा रहते हैं. रेस्टोरेंट बंद होने या गैस महंगी होने की वजह से खाना महंगा हो गया है. कई जगहों पर तो लोगों को खाना भी आसानी से नहीं मिल पा रहा. वहीं रेस्टोरेंट और भोजनालय चलाने वाले लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की समस्या हल नहीं हुई तो शहर में कई छोटे कारोबार हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं.

About the Author

Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



Source link