मध्य प्रदेश में खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने वाले किसानों पर अब सरकार सख्ती करेगी। बार-बार नरवाई जलाते पाए जाने वाले किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीदी नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, जुर्माना भी लगाया जाएगा। वहीं, जो ग्राम पंचायत
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क्यों हो रही है सख्ती? प्रदेश में रबी और खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा हैं। इससे खेत की उपजाऊ मिट्टी खराब हो रही है और गंभीर वायु प्रदूषण भी फैल रहा है। इसी को रोकने के लिए यह कदम उठाए जा रहे हैं।
जिला स्तरीय समिति करेगी कार्रवाई नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए हर जिले में एक जिला स्तरीय समिति बनाई गई है। यह समिति फसल अवशेष जलाने वालों पर दंडात्मक और प्रशासनिक कार्रवाई करेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
‘नरवाई मुक्त’ पंचायतों को मिलेगा इनाम कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि किसानों को नरवाई जलाने से रोकने और इसके दूसरे उपयोगों के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से एक नई पहल की जा रही है। जो ग्राम पंचायतें अपने गांव को ‘फसल अवशेष जलाने से मुक्त ग्राम’ बनाएंगी, उन्हें जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
जलाने से नष्ट हो जाते हैं कीमती पोषक तत्व कृषि परियोजना संचालक (आत्मा) डॉ. आनंद कुमार बडोनिया ने बताया कि एक टन धान के भूसे को जलाने से मिट्टी को मिलने वाले कई कीमती पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इनमें लगभग 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फास्फोरस, 25 किलो पोटेशियम, 1.2 किलो सल्फर और करीब 400 किलो कार्बन शामिल है। ये सभी जलाने से पूरी तरह खत्म हो जाते हैं।
नरवाई जलाने के अन्य गंभीर नुकसान
- भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होती है।
- मिट्टी में मौजूद जैविक तत्व और लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
- वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे इंसानों और पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
- धुएं से दृश्यता कम होती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
- पशुओं के चारे (भूसा) की बर्बादी होती है।