Balaghat News: भारतीय कृषि एक समय पर पूरी तरह से प्राकृतिक थी. तब खेती उपज होती थी, लेकिन उतनी नहीं की भारत की बढ़ती आबादी की भूख मिटा दे. फिर उत्पादन बढ़ाने के लिए हरित क्रांति आई, जिसमें अच्छे गुणवत्ता के बीज, खेती के नए तरीके और उर्वरकों के इस्तेमाल का चलन बढ़ा. इसमें एक बात है जो गौर करने वाली है वो है रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल. इसका इस्तेमाल इतना बढ़ा कि हम उसे कंट्रोल नहीं कर पाए.
सबसे पहले जानिए क्या प्राकृतिक खेती
प्राचीन काल में प्राकृतिक खेती हुआ करती थी. प्राकृतिक खेती में किसान भाई को बाजार से किसी भी दवा, बीज, कीटनाशक या खरपतवार नाशक की जरूरत नहीं होती है. वह खेत या प्रकृति से मिली चीजों को लेकर खेती करता है. इसमें देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग किया जाता है. इस विधि में मिट्टी के स्वास्थ्य और उर्वरता को बनाए रखने के लिए जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र जैसे मिश्रणों का उपयोग होता है, जिससे फसल की लागत कम होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है. यह पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देती है और सुरक्षित तथा पौष्टिक भोजन प्रदान करती है. ऐसे में इसे जीरो बजट फार्मिंग भी कहते हैं. प्राकृतिक खेती का मतलब वह खेती जो प्रकृति पर निर्भर रहकर खेती करने से है. इसे प्राकृतिक खेती कहते हैं.
अब जानिए प्राकृतिक खेती की जरूरत क्यों पड़ी
डॉक्टर धुवारे का कहना है कि अब प्राकृतिक खेती की जरूरत है. दरअसल, किसान भाई खेतों में अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में खेती पर भी असर पड़ रहा है. उपज भले ही ज्यादा हो रही हो लेकिन भूमि अपनी उर्वरा शक्ति खो रही है, जिससे आने वाली पीढ़ी के लिए एक गंभीर समस्या बनेगी. वहीं, इसके इस्तेमाल में मित्र कीट और मित्र जीवाणु नष्ट होते हैं, जिससे भूमि अपनी प्राकृतिक शक्तियां खो रही है. वहीं, रसायनों के इस्तेमाल से उत्पादन कम हो रहा है. ऐसे में लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो रही है. वहीं, दूसरी तरफ लोगों इम्यूनिटी पावर भी कम हो रही है, जिससे आज प्राकृतिक खेती की जरूरत पड़ रही है.
ऐसे शुरू कर सकते हैं प्राकृतिक खेती
किसान भाई अगर प्राकृतिक खेती करना चाहते हैं, तो कम से कम अपने लिए अनाज उगाने से शुरू कर सकते हैं. फिर धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाकर बड़े स्केल पर प्राकृतिक खेती कर सकते हैं.
जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में क्या अंतर
रासायनिक खेती से जैविक खेती का ट्रेंड आया है. अब प्राकृतिक खेती की बात हो रही है, लेकिन जैविक खेती रासायनिक खेती से भी महंगी पड़ती है. इसमें भी कई चीजें बाहर से खरीदकर लाने की जरूरत पड़ती है. वहीं, प्राकृतिक खेती में ऐसा नहीं है. इसमें पूरी निर्भरता प्रकृति पर है. ऐसे में प्राकृतिक खेती जीवाणुओं की संख्या पर आधारित है. ऐसे में ये खेती के दूसरे तरीकों से ज्यादा अच्छी और टिकाऊ है.