क्या चढ़ने वाली है कोच-कप्तान की बलि, बीसीसीआई का सामने आया प्लान

क्या चढ़ने वाली है कोच-कप्तान की बलि, बीसीसीआई का सामने आया प्लान


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भारत हर बार जीत के करीब पहुंचा है अब सिर्फ फिनिशिंग चाहिए यहीं पर हमें हरमनप्रीत और मजूमदार की सक्रिय भूमिका चाहिए. वे और अधिक खुले और जीवंत होकर निर्णय लें क्योंकि अब वक्त आ गया है कि वे पूरी जिम्मेदारी लें और टीम को दिशा दें.

बीसीसीआई महिला टीम का कप्तान और कोच बदलने का बना चुकी है मन

नई दिल्ली. भारत की महिला टीम का प्रदर्शन इस विश्व कप अभियान में अपेक्षा से काफी कमतर रहा है और  अहम मौकों पर टीम बार-बार फेल हुई है. इंग्लैंड के खिलाफ मैच के बाद स्मृति मंधाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईं और पूरे मामले को गरिमा के साथ संभाला. उप-कप्तान ने कप्तान की जिम्मेदारी उठाई और  यही वह बिंदु है जो हमें सोचने पर मजबूर करता है क्या भारत को हरमनप्रीत से आगे देखना चाहिए, भले ही विश्व कप में आगे क्या हो.
यह बात साफ है कि  अभी हरमनप्रीत अभी टीम की सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ों में से एक हैं. इंग्लैंड के खिलाफ उनकी पारी इस बात का प्रमाण है कि वह क्या कर सकती हैं लेकिन बतौर कप्तान, उनका प्रदर्शन असंतोषजनक रहा है. इंग्लैंड ने चार रन से मैच जीत लिया, और जब आप सोचते हैं कि हरमनप्रीत ने रेनुका सिंह ठाकुर से आखिरी ओवर नहीं करवाया और उसकी बजाय श्री चरणी को गेंद थमा दी जबकि उनका दिन अच्छा नहीं रहा था तो आप सोचते हैं, अगर फैसला अलग होता तो नतीजा भी शायद बदल जाता.

दबाव में बिखरने वाले कप्तान-कोच! 

यह केवल हरमनप्रीत की बात नहीं है, यह अमोल मजूमदार की भी बात है. बार-बार कैमरे ने ड्रेसिंग रूम में कोच को दिखाया और साफ नजर आया कि वह दबाव में थे वह घबराए हुए और परेशान दिखे. उन्हें अमनजोत कौर और स्नेह राणा के लिए कुछ निर्देश भेजने चाहिए थे. इनमें से किसी एक को बड़े शॉट खेलने की जरूरत थी. जब मैच फिसल ही रहा था, तो उसे लंबा खींचने का कोई मतलब नहीं था. इसके बजाय मजूमदार दबाव में आ गए. ऐसा हो सकता है, लेकिन भारत के लिए यह सबसे खराब समय था जब कप्तान और कोच दोनों ही दबाव में बिखर गए.

हारे तो जाएगा हरमनप्रीत और मजुमदार का पद 

भारत हर बार जीत के करीब पहुंचा है अब सिर्फ फिनिशिंग चाहिए यहीं पर हमें हरमनप्रीत और मजूमदार की सक्रिय भूमिका चाहिए.  वे और अधिक खुले और जीवंत होकर निर्णय लें क्योंकि अब वक्त आ गया है कि वे पूरी जिम्मेदारी लें और टीम को दिशा दें. अगर कभी नेतृत्व की जरूरत थी, तो वह वक्त यही है. एक नाकाम वर्ल्ड कप अभियान इस खेल को पीछे धकेल सकता है, और दोनों ही कप्तान और कोच अपनी नौकरी गंवा सकते हैं.  ऐसे में अब और देरी की कोई गुंजाइश नहीं.  जो भी जरूरी हो, करें और जीतने की जिद दिखाएं.

जीत पुराने जायके को बदल देगी 

इंग्लैंड से हार के बाद अधिकतर मीडिया और फैंस स्तब्ध थे गुस्सा और निराशा थी यह स्वाभाविक भी है लेकिन अब जबकि कुछ वक्त गुजर चुका है और हम सब थोड़ा शांत हो गए हैं, तो यह कहने का समय है टीम के साथ खड़े होइए. अगले दो मुकाबलों के लिए टीम को समर्थन दें, क्योंकि ये मुकाबले “करो या मरो” जैसे हैं. विश्लेषण और पोस्टमार्टम करने का वक्त बाद में भी मिलेगा.  दो जीत, और सब कुछ बदल सकता है फैंस का समर्थन फर्क ला सकता है, और भारत का नवी मुंबई में रिकॉर्ड भी अच्छा रहा है. भारत के लिए अब बीते कल को भुलाकर आगे देखने का समय है. विश्व कप का असली आगाज़ न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच से होगा और टीम को अब वही नजरिया अपनाना होगा.

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