छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम में भी दीपावली का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। धाम परिसर को सवा लाख दीपों की रोशनी से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर स्वर्णिम आभा से जगमगा उठा।
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धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बालाजी के चरणों में पूजा-अर्चना की, दीपक जलाए, तथा गोशाला में गौ, अश्व और वाहन पूजन किया। इसके बाद उन्होंने सेवादारों और कर्मचारियों को मिठाई बांटी और दक्षिणा स्वरूप चांदी के सिक्के प्रदान किए।
महाराज ने इस अवसर पर कहा “दीपावली पर दीपक जलाने से केवल देवी लक्ष्मी का आगमन नहीं होता बल्कि ज्ञान का प्रकाश भी फैलता है।” उन्होंने कहा कि दीपक अंधकार से प्रकाश और अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने का प्रतीक है।
महाराज ने की आतिशबाजी, बताया प्रदूषण पर अपना मत बागेश्वर धाम में दीपावली के दौरान आतिशबाजी भी की गई। महाराज श्री ने कहा कि प्रदूषण के अन्य भी कई कारण हैं “लंबे समय से रूस-यूक्रेन का युद्ध चल रहा है, क्या उससे प्रदूषण नहीं होता? केवल पटाखों से ही प्रदूषण नहीं फैलता, लेकिन खतरनाक पटाखों से जरूर बचना चाहिए।”
पारंपरिक मौनिया नृत्य से गूंजा धाम दीपावली के अगले दिन बुंदेलखंड की पारंपरिक मौनिया नृत्य की टोली बागेश्वर धाम पहुंची। उन्होंने बालाजी के दर्शन कर नृत्य प्रस्तुत किया।
महाराज ने मौनिया गीत गाया और इस नृत्य की महिमा बताते हुए कहा “मौनिया नृत्य के दर्शन मात्र से ही मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।” उन्होंने बताया कि इस नृत्य में लोग भगवान श्रीकृष्ण के ग्वाल रूप में मौन रहकर नृत्य करते हैं। कमर में नारियल-सुपारी बांधकर 12 वर्षों तक मौन व्रत रखते हैं और 13वें वर्ष वृंदावन जाकर साधना पूर्ण करते हैं।
देशभर से पहुंचे भक्त, मनाई दिवाली देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त बागेश्वर धाम पहुंचे और महाराज श्री के सान्निध्य में दीपावली मनाई। सूरत से आए कालू भाई ने बताया कि, “बागेश्वर धाम हमारे पिता का घर है, हर त्योहार हम यहीं मनाते हैं।” वहीं हरिद्वार (उत्तराखंड) से आए विनय सिंह ने कहा कि वे पिछले पांच दिनों से अस्वस्थ थे, लेकिन धाम पहुंचते ही उन्हें सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ और उनकी पीड़ा समाप्त हो गई। सवा लाख दीपों की जगमगाहट और भक्तों की आस्था से इस वर्ष बागेश्वर धाम दिवाली की आध्यात्मिक ज्योति से आलोकित हुआ।