ग्वालियर में कार्बाइड गन से 19 हुए घायल: एक की आंख का कॉर्निया जला, भोपाल एम्स रेफर किया, आंख की रोशनी जाने की आशंका – Gwalior News

ग्वालियर में कार्बाइड गन से 19 हुए घायल:  एक की आंख का कॉर्निया जला, भोपाल एम्स रेफर किया, आंख की रोशनी जाने की आशंका – Gwalior News


यह है कार्बाइड गन, जिससे दीपावली पर कई युवाओं की आंख की रोशनी जाने की नौबत आ गई है।

ग्वालियर में बुधवार को कार्बाइड गन (देशी पटाखा गन) से घायल होने के एक के बाद एक कई केस सामने आए हैं। तीन दिन में 19 युवा कार्बाइड गन से घायल हुए हैं। बुधवार को गोहद निवासी दो युवक सतेन्द्र और सूरज ग्वालियर के डीडी नगर में कार्बाइड गन चलाते समय घायल ह

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इसी कार्बाइड गन छीन रही आंखों की रोशनी।

भिंड के गोहद निवासी सतेन्द्र सिंह गुर्जर व सूरज गुर्जर अभी ग्वालियर के डीडी नगर में किराए पर रहते हैं। यहां रहकर वह पढ़ाई करते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कार्बाइड गन (देशी पटाखा गन) का एड देखा था, जिस पर उन्होंने 200 रुपए में एक कार्बाइड गन ऑनलाइन खरीदी थी। मंगलवार की रात को जब वह कार्बाइड गन चला रहे थे तो गैस लाइटर का ट्रिगर दबाने के बाद भी धमाका नहीं हुआ।

इस पर सतेन्द्र ने कार्बाइड गन में जहां से पानी डालते हैं वहां से देखने का प्रयास किया तभी अचानक धमाका हो गया। सतेन्द्र और सूरज की आंख का कॉर्निया जल गया। गंभीर हालत में दोनों को जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। जहां सूरज की आंख का ऑपरेशन किया गया है, लेकिन सतेन्द्र की आंख का कॉर्निया बुरी तरह जल चुका है, जिस कारण जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने भोपाल एम्स में संपर्क कर सतेन्द्र को भोपाल के लिए रेफर कर दिया है। बुधवार को हुए आठ ऑपरेशन कार्बाइड गन से चोटिल हुए लोगों की संख्या निजी अस्पतालों का आंकड़ा आने के बाद 19 पहुंच गई है। बता दें कि दीपावली से अभी तक सरकारी अस्पतालों में छुट्‌टी का माहौल है, सिर्फ इमरजेंसी डिपार्टमेंट की काम कर रहे हैं। ऐसे में देसी पटाखा गन से घायल होने वाले निजी अस्पतालों में ज्यादा पहुंचे हैं। बुधवार को रतन ज्योति नेत्रालय, जिला अस्पताल व जेएएच के नेत्र रोग विभाग में 8 घायल मरीजों का ऑपरेशन किए गए हैं। रतन ज्योति नेत्रालय में 15 केस जेएएच व जिला अस्पताल में चार केस आए हैं, लेकिन अकेले रतन ज्योति नेत्रालय में 15 के लगभग ऐसे केस आए हैं जिसमें आतिशबाजी व कार्बाइड गन से आंख में चोट लगी है। सभी का इलाज किया जा रहा है। निजी अस्पताल का आंकड़ा बुधवार को बाहर आया है। यह रखें सावधानी डॉ. रौनक अग्रवाल ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की आंख में इस गन के कारण चोट लगी, तो उसे आंख रगड़नी नहीं चाहिए। आंख रगड़ने से कार्बाइड के कण अंदर घुस जाते हैं, जिससे स्थायी नुकसान हो सकता है। इसमें सबसे बड़ा खतरा कॉर्निया के क्षतिग्रस्त होने का है।

कई केस में इमरजेंसी सर्जरी ही विकल्प बनती है। यदि कोई इस गन की चपेट में आए तो न हाथ लगाएं और न आंख साफ करने का प्रयास करें। सस्ती देसी गन बनी खतरनाक ट्रेंड बाजार में 100 से 200 रुपए में मिलने वाली यह गन अब ‘खतरनाक ट्रेंड’ बन चुकी है। इसमें भरा कैल्शियम कार्बाइड पानी के संपर्क में आने पर एसीटिलीन गैस बनाता है। यह गैस विस्फोट के साथ जलती है और कुछ ही सेकंड में आंखों, त्वचा और चेहरे को झुलसा देती है। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गजराज सिंह ने बताया

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एक मरीज कार्बाइड गन से आंख में चोट लगने से आया था। युवक का कॉर्निया जल जाने से वह भाग सफेद हो गया था। उसे भोपाल एम्स के लिए रेफर किया गया है। अब वहां उसका इलाज चल रहा है।

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