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Naxalites Brutal Reality: जब नक्सलवाद अपने चरम पर था. तब मुखबिरी की के शक में लोगों को अपना निशाना बनाते थे. उनकी इतनी बेरहमी से हत्या करते थे कि कोई उनके खिलाफ जाने की हिम्मत न करें. साल 1999 में नक्सलियों ने सुखलाल उइके को मुखबिरी के शक उठा लिया. उन्हें शक था कि वह एसपी-कलेक्टर के साथ घूमता है, तो ठिकानों की जानकारी भी देता होगा.
“साल था 1999…नक्सली एक शख्स को उठा ले गए. बैल की तरह गले में रस्सी बांधी और जंगल ले गए. पेड़ से बांधा और गीली लकड़ी से मारा. बेरहम नक्सलियों ने शख्स की पैर की उंगलियां काट दी. वह मिन्नतें करता रहा कि…दादी (छत्तीसगढ़ी में सम्मान से बोले जाने वाला शब्द) मुझे जाने दो…मैं कुछ नहीं किया. मैं मर जाऊंगा तो मेरी मां का क्या होगा. नक्सली बोले तुम्हारे घर वालों का ख्याल रखने के लिए एसपी कलेक्टर है. इसके बाद शख्स को तब तक काटते रहे, जब तक उसके शरीर का खून न निकल गया. फिर उसकी मौत हो गई.”
भले ही नक्सलवाद सिमट रहा हो लेकिन अब भी बालाघाट की मिट्टी पर लाल आतंक के निशान दिख जाते हैं. अब भी पीड़ितों के जहन में खौफ है और उम्मीद है सरकार से कि उनकी कुर्बानियों के लिए थोड़ी सी मदद मिल जाए. दरअसल, ये किस्सा शहीद की पत्नी जीरा बाई ने मीडिया को बताया. लेकिन उनकी एक शिकायत भी है कि उनके बच्चों को कम से कम एक नौकरी मिल जाए, जिससे उनका गुजारा ठीक से हो सके.
शाहिद के बच्चों के लिए कुछ करेंगे
इस मामले पर एसपी आदित्य मिश्रा का कहना है कि नक्सल उन्मूलन की नीतियां बदलती रही है. 1997 के 2000 में फिर 2023 में बदली. ऐसे में उस समय जो योजना चलती थी उसके मुताबिक उन्हें सुविधाएं मिली. अब पीड़ितों का नंबर नोट किया गया है, ऐसे में अब सुविधा के मुताबिक उन्हें रोजगार दिया जाएगा.
पुलिस स्मृति दिवस पर छलका शहीदों के परिजनों का दर्द
बालाघाट में करीब 35 सालों से नक्सलवाद है. नक्सलियों के खिलाफ जंग में अब तक 104 जवानों ने अपनी जान गवाई है. ऐसे में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस शहीदों को याद करने के लिए पुलिस स्मृति दिवस मनाती है. इन वीरों को याद कर पुलिस लाइन स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते हैं.
शहीदों के परिजनों के लिए लगता है कैंप
शहीदों के परिवारों को कार्यक्रम में बुलाकर पुलिस प्रशासनसाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया. बालाघाट पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि हर साल शहीदों के परिवारों को सम्मानित करने के साथ-साथ उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि शहीद परिवारों की सहायता के लिए विशेष सेल का गठन किया गया है, ताकि उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण हो सके.
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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