विश्व का इकलौता मंदिर जहां बंटता सिंदूर प्रसाद… महिलाओं की लंबी कतार, क्यों खास है जानिए

विश्व का इकलौता मंदिर जहां बंटता सिंदूर प्रसाद… महिलाओं की लंबी कतार, क्यों खास है जानिए


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Suhag Padwa Ujjain News: उज्जैन का गजलक्ष्मी मंदिर विश्व में अपने यहां एक तरह का एकमात्र स्थल है, जहां हर साल सिर्फ एक दिन सिंदूर प्रसाद बंटता है. इस विशेष अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ सुबह से ही जमा होती है. लाखों श्रद्धालु इस प्रसाद के लिए तत्पर रहते हैं, जो इस मंदिर की धार्मिक महत्वता को और बढ़ाता है.

Suhag Padwa Ujjain News: विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी में ऐसे तो सैकड़ों मंदिर हैं. लेकिन यहां एक ऐसा मंदिर भी है जो विश्व में केवल एक ही है. यहां स्थित गजलक्ष्मी मंदिर में दीप पर्व के समय भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. यह मंदिर की भी महिमा अपार है. गजलक्ष्मी लक्ष्मी के आठ रूपों में से एक हैं. उज्जैन के मध्य सराफा बाजार में मां गजलक्ष्मी के मंदिर है, जहां 5 दिवसीय दीप पर्व पर श्रद्धालुओं का तांता लगता है. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि गजलक्ष्मी का यह मंदिर करीब 2 हजार वर्ष पुराना है. इस मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण में भी मिलता है. गजलक्ष्मी माता राजा विक्रमादित्य की राजलक्ष्मी भी कहलाती हैं. हाथी पर सवार लक्ष्मी माता की दुर्लभ प्रतिमा विक्रमादित्य के समय की है जो आज भी अद्वितीय है. आज यहा रात से ही लाखों भक्तों का तांता लगा हुआ है.

भगवान का कोई भी प्रसाद हो वह खास ही रहता है, लेकिन गजलक्ष्मी मंदिर का सिंदूर प्रसाद साल में केवल एक दिन सुहाग पड़वा के दिन ही मिलता है. साल भर माता के दर्शन करने हजारों भक्त आते हैं, वे माता को सिंदूर चढ़ाते हैं. मंदिर के पुजारी इस सिंदूर को इकट्‌ठा कर साल भर में एक बार सुहाग पड़वा के दिन बांटते हैं. मान्यता है कि यह सिंदूर ले जाने से घर में मां लक्ष्मी का वास बना रहता है, इसलिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु यह प्रसाद लेने आते हैं.

सुहाग पड़वा पर लगी है कतार
मंदिर के पुजारी सागर ने बताया कि उन्होंने माता के प्रसाद के लिए करीब एक महीने पहले से तैयारी कर ली थी. यहां सुहाग पड़वा पर लाखों की संख्या मे श्रद्धालूओं की भीड़ लगती है. इस बार हमने पांच लाख सिंदूर प्रसाद की पुड़िया बनाई थी. श्रद्धांलुओं को प्रसाद के रूप मे वितरित करने के लिए, लेकिन 12 बजे ही करीब 3 लाख से ज्यादा प्रसाद की पुड़िया भक्तों में वितरित कर दी गईं है. अभी और करीब 4 लाख श्रद्धालूओं की आने की उम्मीद है. उसको देखते हुए हम और प्रसाद तैयार कर रहे हैं.

श्रद्धालु ने बताया प्रसाद का महत्व
श्रद्धालु शालिनी श्रीवास्तव ने लोकल18 को बताया कि वह यहां 15 साल से आ रही हैं. आज के दिन यहां काफी लंबी लाइन देखने को मिलती हैं. यहां हर मनोकामना पूर्ण होती है. यह लक्ष्मी जी का मंदिर बेहद चमत्कारी है. दिवाली के समय यहां पर 5 दिवसीय उत्सव मनाया जाता है, जिसमें अंतिम दिन सुहाग पड़वा को प्रसाद के रूप में विशेष सिंदूर मिलता है. साल भर इस सिंदूर का बेसब्री से इंतजार रहता है. यह सिंदूर ले जाने से घर में मां लक्ष्मी का वास बना रहता है, इसलिए भारी संख्या में यहां पर दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं.

Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re… और पढ़ें

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