MP AQI Today: दिवाली के बाद जहरीली हुई MP की हवा! इंदौर-भोपाल में सांस लेना हुआ मुश्किल, जानिए AQI लेवल

MP AQI Today: दिवाली के बाद जहरीली हुई MP की हवा! इंदौर-भोपाल में सांस लेना हुआ मुश्किल, जानिए AQI लेवल


MP AQI Today: मध्य प्रदेश में दिवाली की रौनक भले ही फीकी पड़ गई हो, लेकिन पटाखों की चमक ने हवा को जहरीला बना दिया है. राज्य के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) स्तर खतरनाक सीमा को छू गया है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो चला है. भोपाल और इंदौर जैसे महानगरों में प्रदूषण का कहर जारी है, जबकि अन्य जिलों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्तर ‘अस्वस्थ’ और ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच चुका है, जो स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा है.

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य का औसत AQI 150 के आसपास घूम रहा है, जो ‘अस्वस्थ’ की श्रेणी में आता है. भोपाल में AQI 170 दर्ज किया गया, जो ‘अस्वस्थ’ स्तर पर है. यहां कलेक्ट्रेट परिसर और टीटी नगर जैसे इलाकों में प्रदूषण की स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है. इंदौर, जो कभी ‘स्वच्छ शहर’ के नाम से जाना जाता था, अब प्रदूषण की चपेट में है. यहां AQI का स्तर स्पष्ट रूप से ‘अस्वस्थ’ पाया गया, हालांकि सटीक आंकड़ा 173 के करीब होने की जानकारी मिल रही है. बेतमा (इंदौर के निकट) में तो AQI 173 पहुंच गया, जो निवासियों के लिए सिरदर्द का सबब बन रहा है.

दूसरी ओर, देवास में AQI 168, ग्वालियर में 163 और बुरहानपुर में 163 दर्ज किया गया—सभी ‘अस्वस्थ’ श्रेणी में. जबलपुर का स्तर 143 (‘खराब’) और कटनी में 147 (‘खराब’) रहा. दमोह एकमात्र जिला है जहां AQI 90 पर स्थिर है, जो ‘मध्यम’ स्तर का संकेत देता है. ये आंकड़े दिवाली के ठीक बाद के हैं, जब पटाखों से निकले कण हवा में घुलमिल गए. विशेषज्ञों के अनुसार, ठंडी हवाओं और कम गति वाली आंधियों ने प्रदूषण के कणों को जमीन के पास जमा कर दिया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई. हालांकि, पराली जलाने का असर कम दिख रहा है, लेकिन वाहनों का धुआं और औद्योगिक उत्सर्जन भी इसमें योगदान दे रहे हैं.

यह प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रहा है. सांस और हृदय रोगियों, बच्चों व बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा है. डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ते PM2.5 और PM10 कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे खांसी, सांस फूलना, आंखों में जलन और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. लंबे समय तक संपर्क से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और यहां तक कि कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है. मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चेतावनी जारी की है कि यदि स्तर यूं ही बढ़ा, तो स्कूलों में छुट्टियां या मास्क अनिवार्य करने जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं.

सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है. सुबह-शाम घर से बाहर न निकलें, क्योंकि इन समयों में प्रदूषण चरम पर होता है. बाहर जाते वक्त N-95 मास्क या डबल सर्जिकल मास्क जरूर लगाएं. घर में एयर प्यूरिफायर का उपयोग करें, पौधे लगाएं और पानी-भाप का सेवन बढ़ाएं. लक्षण दिखने पर तुरंत पल्मोनोलॉजिस्ट से संपर्क करें. पर्यावरण मंत्री डॉ. दिलीप जायस्वाल ने कहा, “दिवाली की खुशी को प्रदूषण से खराब न होने दें. हम कड़े उपाय कर रहे हैं, लेकिन जनभागीदारी जरूरी है.”

मौसम विभाग की मानें तो अगले कुछ दिनों में हल्की बारिश से राहत मिल सकती है, लेकिन तब तक सतर्क रहना ही एकमात्र विकल्प है. मध्य प्रदेश की यह प्रदूषण की लहर न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रही है—पर्यटन और स्वास्थ्य खर्च बढ़ रहे हैं. क्या राज्य सरकार अब ‘स्वच्छ हवा अभियान’ को तेज करेगी? यह सवाल लाखों नागरिकों के जेहन में कौंध रहा है. फिलहाल, मास्क और धैर्य ही हथियार हैं.



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