सागर का इस मशहूर पान के आशुतोष राणा भी फैन, 70 सालों का स्वाद बरकरार

सागर का इस मशहूर पान के आशुतोष राणा भी फैन, 70 सालों का स्वाद बरकरार


Sagar News: मध्य प्रदेश का दिल कहे जाने वाला सागर अपनी मिठास के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. यहां का बनारसी पान भी उतना ही मशहूर है. शहरवासी तो रोजाना इसका स्वाद लेते ही हैं, लेकिन जो एक बार इस पान को खा ले, वह इसे जिंदगीभर नहीं भूल पाता. सागर में 70 साल पुरानी बनारसी पान की दुकान है, जहां दूर-दूर से लोग सिर्फ पान खाने आते हैं. 10 तरह के मसालों से तैयार यह पान 7 रुपए से 30 रुपए तक में मिलता है.

शहर के तीन बत्ती से कोतवाली जाने वाले रोड पर स्थित बनारसी पान भंडार की शुरुआत साल 1958 में स्वर्गीय शालिग्राम चौरसिया ने की थी. यहां का पान इतना प्रसिद्ध है कि जो एक बार खा ले, वह दीवाना हो जाता है. सागर के कई लोग आज विदेशों में बस गए हैं, लेकिन जब भी सालों बाद अपने शहर लौटते हैं, तो इस दुकान का बनारसी पान खाना नहीं भूलते.

लोकप्रिय किताब ‘मौन मुस्कान की मार’ में भी इस पान और दुकान का ज़िक्र

फिल्म अभिनेता और लेखक आशुतोष राणा भी इस दुकान के नियमित ग्राहक रहे हैं. डॉक्टर हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वे रोजाना यहां पान खाने आते थे. इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी लोकप्रिय किताब ‘मौन मुस्कान की मार’ में भी इस पान और दुकान का ज़िक्र किया है. दुकान के संचालक भोले बनारसी (चौरसिया) बताते हैं कि इस बार 8 साल बाद डॉक्टर सिंघाई के बेटे अमेरिका से दीपावली पर लौटे तो वे हर दिन पान खाने आते रहे. और 8 साल बाद फिर उसी स्वाद का आनंद लिया. “जो भी इस पान को जानता है, वह जब भी सागर आता है, यहां जरूर रुकता है,” भोले बनारसी कहते हैं.

70 साल बाद भी वही स्वाद बरकरार

पिता के निधन के बाद अब दुकान को भोले बनारसी संभाल रहे हैं. वे बताते हैं “हम आज भी उसी परंपरा को निभा रहे हैं, जो पिता जी ने सौंपी थी. उनके जमाने के पीतल के बर्तनों में ही सुपारी, लौंग, सौंफ, किमाम, चमनबहार, कत्था और चूना रखा जाता है. पान में हर मसाले की वही निश्चित मात्रा मिलाई जाती है, जो उन्होंने बताई थी. इसलिए 70 साल बाद भी वही स्वाद बरकरार है.”

इस दुकान की खासियत यह है कि यहां सिर्फ पान बेचा जाता है — जर्दा, तंबाकू, गुटखा, बीड़ी या सिगरेट जैसी कोई चीज नहीं मिलती. यह सागर संभाग की ऐसी पहली और इकलौती दुकान है, जो तीन पीढ़ियों से यह परंपरा निभा रही है. यहां केवल पान के शौकीन ग्राहक ही आते हैं.

पान के प्रकार और कीमतें

बंगला सादा पान – ₹7

बंगला फुल मीठा पान – ₹10

मीठी पत्ती सादी – ₹10

मीठी पत्ती फुल मीठी – ₹15

मीठा गुटका – ₹15

वर्क वाला मीठा पान – ₹30

दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों पर यहां स्पेशल पान तैयार किए जाते हैं, जिनका स्वाद शहर के हर पान प्रेमी के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता.



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