₹154 करोड़ के ब्रिज के गड्‌ढों को छुपाने बिछाया डामर…उखड़ा: भोपाल में MP का दूसरा सबसे लंबा ब्रिज; कई जगह से उखड़ी डामर की परत – Bhopal News

₹154 करोड़ के ब्रिज के गड्‌ढों को छुपाने बिछाया डामर…उखड़ा:  भोपाल में MP का दूसरा सबसे लंबा ब्रिज; कई जगह से उखड़ी डामर की परत – Bhopal News


ब्रिज में गड्‌ढे स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

90 डिग्री डिजाइन वाले ब्रिज को लेकर देशभर में सुर्खियां बंटाेरने वाला मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग (PWD) महकमा एक बार फिर चर्चा है। अबकी बार यह विभाग भोपाल में एमपी के दूसरे सबसे लंबे ब्रिज को लेकर सवालों के घेरे में आया है।

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कुल 154 करोड़ रुपए का यह अंबेडकर ब्रिज (जीजी ओवरफ्लाई) पहली बार भी नहीं सहन सका। कई जगह से ब्रिज से डामर की परतें उखड़ गई हैं तो बीच में लगे लोहे के एंगल बाहर झांक रहे हैं।

जिम्मेदारों ने गड्‌ढों को छुपाने के लिए डामर जरूर बिछाया, लेकिन वो भी उखड़ गया। इस वजह से स्पीड में दौड़ती गाड़ियां अचानक थम जाती है। लोहे के एंगल बाहर निकलने से भी हादसे का डर बना रहता है।

अफसरों ने बताया कि बारिश के दौरान करीब 10 बार गड्‌ढों को भरा गया और डामर की परत बिछाई गई थी, लेकिन अब फिर से यह उखड़ रहा है।

6 KM घूमी भास्कर टीम, देखा एक-एक स्पॉट अंबेडकर ब्रिज गणेश मंदिर से गायत्री मंदिर के बीच कुल 2900 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है। एक थर्ड लेन सरकारी प्रेस की ओर निकली है। करीब 6 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज पर भास्कर टीम घूमी। यहां का एक-एक स्पॉट देखा।

जिन जगहों पर लोहे के एंगल लगे हैं, उनके आसपास की सड़क उखड़ गई है। भोपाल हाट की तरफ सड़क पर गड्‌ढे हैं। डीबी मॉल के सामने जो छोटी रोटी बनी है, वहां का हिस्सा भी उखड़ा हुआ है।

स्पीड ब्रेकर पर करीब 5 फीट का हिस्सा भी ठीक नहीं है। ब्रिज के दोनों ओर ही डामर उखड़ रहा है। इस संबंध में चीफ इंजीनियर ब्रिज पीसी वर्मा से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने बात नहीं की।

ब्रिज की 3 तस्वीरें…

एमपी नगर में डीबी मॉल के सामने स्पीड ब्रेकर के पास भी सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है।

सड़क के बीच में बनी सरफेस में भी दरारें हैं।

सड़क के बीच में बनी सरफेस में भी दरारें हैं।

ब्रिज की सफाई को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कोने में मिट्‌टी और कचरा जमा है।

ब्रिज की सफाई को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कोने में मिट्‌टी और कचरा जमा है।

रोज हजारों VVIP और लोग गुजरते हैं इसी साल 23 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ब्रिज का लोकार्पण किया था। इसके बाद से हर रोज हजारों वीवीआईपी और आम लोग ब्रिज के ऊपर से गुजर रहे हैं।

तब यह प्रदेश का पहला सबसे लंबा ब्रिज था। बाद में जबलपुर में इससे लंबा ब्रिज बना। इस हिसाब से अब यह प्रदेश का दूसरा सबसे लंबा ब्रिज है।

शुरू होने के साथ ही सवालों के घेरे में ब्रिज पर ट्रैफिक शुरू होने के साथ सिविल इंजीनियरिंग में खामियां सामने आई थीं। इस पर सरकार ने प्रोजेक्ट प्रभारी सहायक यंत्री (एई) रवि शुक्ला और सब इंजीनियर उमाकांत मिश्रा को सस्पेंड कर दिया था।

चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर जावेद शकील को कारण बताओ नोटिस जारी दिए गए थे। वहीं, निर्माण कंपनी पर भी पेनल्टी लगाने के आदेश दिए थे।

ब्रिज पर बिछाया गया डामर कई जगह से उखड़ गया है।

ब्रिज पर बिछाया गया डामर कई जगह से उखड़ गया है।

पहले ये 3 खामियां मिल चुकी हैं…

  • सीमेंट क्रांकीट में खुरदुरापन: फ्लाई ओवर पर वाहन फिसलें नहीं, इसलिए एंटी स्किड (खुरदुरापन) डिजाइन किया गया था, लेकिन यह कहीं ज्यादा तो कहीं कम था। इस कारण गाड़ियां गुजरने पर वाइब्रेशन ज्यादा हो रहा था। इससे वाहन चालकों का ध्यान भटक रहा था।
  • सरफेस पर दरारें: गणेश मंदिर की ओर से वल्लभ भवन चौराहा की ओर वाली भुजा में कंक्रीट टॉप सरफेस पर छोटे-छोटे क्रेक सामने आए थे। इन्हें केज क्रेक (सिकुड़न वाली दरारें) कहा जाता है। ट्रैफिक का दबाव बढ़ने पर ये क्रेक बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो जाते हैं। अभी भी ऐसे ही हाल है। सरफेस के आसपास का हिस्सा जर्जर हो रहा है।
  • नए ब्रिज में ही नजर आए पेंचवर्क: जब फ्लाईओवर से ट्रैफिक शुरू हुआ था, तभी कई जगह पर पेंचवर्क नजर आए। फ्लाईओवर की सरफेस से कांक्रीट उखड़ा था, जिसे बाद में ठीक किया गया।
गड्‌ढों को छुपाने के लिए उस पर डामर बिछा दिया गया।

गड्‌ढों को छुपाने के लिए उस पर डामर बिछा दिया गया।

गलती छुपाने के लिए पूरे ब्रिज पर ही डामर की परत बिछाई शुरुआत में बड़ी गलती सामने आने के बाद उसे छुपाने का काम भी हुआ। पीडब्ल्यूडी ने दोनों ओर पूरे ब्रिज पर ही डामर की परत बिछा दी। इससे राहगीरों को बड़ी राहत मिली, लेकिन यही डामर की परत अब उखड़ गई है।

सरकारी प्रेस की ओर रोटरी नहीं बनी, भर जाता है पानी डाक भवन तिराहा यानी, सरकारी प्रेस के पास एक्सपर्ट ने रोटरी की जरूरत बताई थी, जो 10 महीने बाद भी नहीं बन पाई है। इस कारण पर्यावास की तरफ से आने वाले वाहन, फ्लाईओवर पर चढ़ने के लिए उस लेन को क्रॉस कर रहे हैं, जो फ्लाईओवर से उतरने के लिए बनी है। फ्लाईओवर पर वापस चढ़ने में यू टर्न लेने पर हादसा हो सकता है। कई बार गाड़ियां टकराने से बची हैं।

दूसरी ओर, यही पर सीवेज सिस्टम भी नहीं बनाया गया। इस कारण बारिश के दौरान दो फीट तक पानी भर गया और लोगों को ब्रिज के ऊपर चढ़ने-उतरने में दिक्कतें हुईं।

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MP के सबसे लंबे फ्लाईओवर का नाम अब अंबेडकर ब्रिज

मध्य प्रदेश के सबसे लंबे 2.73 किमी के फ्लाईओवर पर गुरुवार को ट्रैफिक शुरू हो गया। भोपाल के गायत्री मंदिर से गणेश मंदिर तक बने इस ब्रिज का नाम जीजी ब्रिज से बदलकर अंबेडकर ब्रिज भी कर दिया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस ब्रिज का नाम अंबेडकर जी के नाम पर रखने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी यादें और योगदान हमेशा जीवित रहें। पढ़े पूरी खबर



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