MP News: एमपी में ‘कार्बाइड गन’ पर बैन, 300 बच्चों की आंखों की रोशनी पर खतरा

MP News: एमपी में ‘कार्बाइड गन’ पर बैन, 300 बच्चों की आंखों की रोशनी पर खतरा


मनोज शर्मा
भोपाल.
दीपावली की खुशियां इस बार कई परिवारों के लिए दर्द बन गईं. मध्यप्रदेश में कैल्शियम कार्बाइड गन से खेलने वाले 300 से ज़्यादा बच्चे घायल हो गए हैं. सबसे ज़्यादा मामले भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और विदिशा से सामने आए हैं. अब सरकार ने इन तीन जिलों में कार्बाइड गन बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है. प्रशासन ने साफ किया है कि अब दुकानों में अगर ये खिलौना गन बिकती पाई गई, तो एफआईआर दर्ज की जाएगी. घटनाओं के बाद कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला किया है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, “सरकार पहले क्यों नहीं जागी? स्वास्थ्य मंत्री इतने कमज़ोर क्यों हैं? अगर विभाग नहीं संभल रहा तो इस्तीफा दें.”

इधर, भोपाल के हमीदिया और सेवा सदन अस्पताल में दर्जनों बच्चे भर्ती हैं. डॉक्टर उनकी आंखों की रोशनी बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. नेत्र रोग विभाग की एचओडी डॉ. कविता कुमार ने बताया, “27 बच्चे हमारे पास आए थे. छह की हालत गंभीर है. उनकी आंखों में कैमिकल जलन, चिंगारी और चोट तीनों तरह के नुकसान हुए हैं.” डॉ. कुमार के मुताबिक 80-90 फीसदी बच्चों की रोशनी दो-तीन महीने में लौट सकती है, लेकिन 10 फीसदी बच्चों की हालत गंभीर है. सात–आठ को लंबा इलाज चलेगा. कई माता-पिता इस हादसे से सदमे में हैं. ममता पंथी ने बताया, “बच्चा गन लेकर आया था, हमें नहीं पता था कि ये इतनी खतरनाक है. अब ऑपरेशन हुआ है.” 14 साल के करण ने कहा, “गन चली नहीं, फिर उलटकर चली और कारतूस आंख में जा लगा.”

इतनी खतरनाक गन बाजार तक कैसे पहुंची?
इसी तरह 11 साल के अंश ने कहा, “मैं तो प्रसाद लेने जा रहा था, उन्होंने फोड़ दिया.” उसकी आंख में भी कंकर चला गया. 15 साल के आरिश ने बताया कि चिंगारी सीधे आंख में लगी, अब धुंधला दिखाई दे रहा है. प्रदेश में अब तक तीन जिलों में पाबंदी लगी है, लेकिन सवाल ये है कि इतनी खतरनाक गन बाजार तक कैसे पहुंची? दीपावली की खुशियों में बच्चों की आंखों से रोशनी छीनने वाले इस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है.

एम्निओटिक मेम्ब्रेन ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी से उम्‍मीद 
सेवा सदन अस्पताल में ऐसे 11 बच्चों की आँखों की सर्जरी की गई है, जो इस देसी बमनुमा गन का शिकार हुए. डॉक्टरों के मुताबिक, इन बच्चों की आँखों की रोशनी बचेगी या नहीं, यह कहना अभी मुश्किल है. न्यूज़ 18 इंडिया की खास रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में बीते एक हफ़्ते में कार्बाइड गन से ज़ख़्मी हुए 61 बच्चों का इलाज किया गया है. इनमें से 11 सबसे गंभीर रूप से घायल बच्चों की आँख में AMT (एम्निओटिक मेम्ब्रेन ट्रांसप्लांटेशन) सर्जरी की गई है. आँख विशेषज्ञ डॉ. प्रेरणा उपाध्याय ने बताया, “इन सभी बच्चों को पटाखों के फटने से गंभीर केमिकल इंजरी हुई है. इस दिवाली बहुत ज़्यादा बच्चों को चोटें आई हैं. आँख में गंभीर डैमेज को कम करने और हीलिंग (उपचार) में मदद के लिए हमने AMT की है. हल्के मामलों में उपचार कर बच्चों को घर भेज दिया गया है, लेकिन गंभीर केस में AMT लगाई गई है, जिससे फ़ायदा मिलने की उम्मीद है.”

आँखों की रोशनी कितनी बचेगी, निश्चित तौर नहीं मालूम 
डॉ. उपाध्याय ने इस केमिकल इंजरी की गहराई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यह केमिकल क्या है, यह हमारे लिए भी नया तजुर्बा है. यह चोट कितनी गहरी गई है, यह वक्त ही बताएगा.” उन्होंने बताया कि मुख्य समस्या कॉर्निया की झिल्ली में डैमेज होना है; आँख का सामने का हिस्सा जल गया है. कई बच्चों को रोशनी बचाने के लिए मल्टीपल सर्जरी की ज़रूरत भी पड़ सकती है. उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि ज़्यादातर मामलों में केवल एक आँख ही डैमेज हुई है. डॉ. उपाध्याय ने स्पष्ट किया, “आँखों की रोशनी कितनी बचेगी, यह अभी निश्चित तौर पर नहीं कह सकते. यह समय ही बताएगा. हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं.”



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