MNREGA Benefits :संजय की बदली किस्मत, पिंक ताइवान की खेती से हर साल कमा रहे 4 लाख, जानें सक्सेस स्टोरी

MNREGA Benefits :संजय की बदली किस्मत, पिंक ताइवान की खेती से हर साल कमा रहे 4 लाख, जानें सक्सेस स्टोरी


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Pink Taiwan Amrood ki Kheti: खरगोन जिले के युवा किसान संजय ने मनरेगा योजना की मदद से अपनी तकदीर बदल दी. कभी मिर्च की खेती से गुज़ारा करने वाले संजय आज अमरूद की खेती से हर साल 4 लाख रुपये तक कमा रहे हैं. थाई पिंक अमरूद की यह खेती न सिर्फ़ उनकी कमाई का जरिया बनी, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का उदाहरण बन गई है.

खरगोन जिले की गोगांवां जनपद पंचायत के ग्राम सिबर के रहने वाले संजय पिता जगदीश की कहानी अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है. दो साल पहले तक वे मिर्च की खेती करते थे, लेकिन लगातार फसल खराब होने और दाम न मिलने से परेशान थे. तभी उन्होंने मनरेगा योजना के तहत निजी वृक्षारोपण लाभ लेने का फैसला किया.

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संजय ने वर्ष 2023-24 में मनरेगा योजना में आवेदन किया, जिसके अंतर्गत उन्हें 3.94 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत हुई. इस सहायता राशि से उन्होंने अपने 1 हेक्टेयर खेत में थाई पिंक अमरूद के 625 पौधे लगाए. उन्होंने पूरे खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई और पौधों की देखभाल वैज्ञानिक तरीके से की.

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थाई पिंक अमरूद की यह प्रजाति खासतौर पर अपने आकार और स्वाद के लिए जानी जाती है. एक फल का वजन करीब 300 ग्राम होता है और हर पौधे से 20 से 25 किलो तक फल की पैदावार होती है. संजय की अमरूद की फसल खरगोन, खंडवा और इंदौर के बाजारों में ऊंचे दाम पर बिकती है.

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संजय बताते हैं कि इस अमरूद की खेती में खर्च बहुत कम है और मेहनत का फल सालों तक मिलता रहता है. एक बार पौधे तैयार हो जाने के बाद 10 से 12 साल तक लगातार उत्पादन होता है. सिंचाई और कटाई-छंटाई पर ध्यान देने से पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है.

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पहले संजय मिर्च की खेती करते थे, लेकिन विल्ट फंगस जैसी बीमारी और बाजार के उतार-चढ़ाव से उन्हें बार-बार नुकसान होता था. अब थाई पिंक अमरूद की खेती से वे हर साल 3.5 से 4 लाख रुपये की स्थायी आमदनी कर रहे हैं. उनकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है और खेती के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ा है.

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संजय खुद एग्रीकल्चर के छात्र रहे हैं और खेती में आधुनिक तकनीक अपनाने पर भरोसा करते हैं. वे कहते हैं कि योजनाओं की जानकारी और उनका सही उपयोग ही सफलता की कुंजी है. उन्होंने गांव के कई युवाओं को भी बागवानी और फलदार पौधों की खेती के लिए प्रेरित किया है.

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आज उनके खेतों में लगे अमरूद के बागान देखकर गांव के कई किसान उनसे सीखने आते हैं. थाई पिंक अमरूद की खुशबू अब सिर्फ़ उनके खेत तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे इलाके में फैल चुकी है. मनरेगा की यह सहायता अब गांव के किसानों के लिए एक नई दिशा दिखा रही है.

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संजय की बदली किस्मत, पिंक ताइवान की खेती से हर साल कमा रहे 4 लाख



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