Snake Rescue:डब्बा खोलते ही मिला सांपों का कुनबा, मौत के फरिश्ते को देख रेस्क्यू वाले भी हैरान, रिहाइसी इलाके में सनसनी!

Snake Rescue:डब्बा खोलते ही मिला सांपों का कुनबा, मौत के फरिश्ते को देख रेस्क्यू वाले भी हैरान, रिहाइसी इलाके में सनसनी!


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Russel Viper Rescue: जहरीले रसल वाइपर ने एक दुकान के अंदर 50 से अधिक बच्चों को जन्म दे दिया, इस खतरनाक सांप का रेस्क्यू करने वाले स्नेक कैचर ने जब इस डिब्बे को देखा तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई, क्योंकि यहां अब केवल एक सांप नहीं मौत के कई फरिश्ते पैदा हो गए थे.

अनुज गौतम, सागर: बुंदेलखंड में सांपों की 30 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें दुनिया का सबसे खतरनाक माने जाने वाला रसल वाइपर पर भी शामिल है, इसी जहरीले रसल वाइपर ने एक दुकान के अंदर 50 से अधिक बच्चों को जन्म दे दिया, इस खतरनाक सांप का रेस्क्यू करने वाले स्नेक कैचर ने जब इस डिब्बे को देखा तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई, क्योंकि यहां अब केवल एक सांप नहीं मौत के कई फरिश्ते पैदा हो गए थे. और अगर गलती से रहवासी इलाके में छूट जाते तो तबाही मचा देते क्योंकि इस सांप का 20 घंटे पहले ही रेस्क्यू किया गया था.

अकील बाबा ने बताया कि सांपों की प्रजाति में बहुत कम ऐसी प्रजाति होती हैं जो अंडे नहीं सीधे जीवित सपोलों को जन्म देती हैं. और जन्म से ही यह बहुत घातक होते हैं, जब वह इस रसल वाइपर को पकड़ कर लाए तो उन्हें पता नहीं था कि यह मादा अपने पेट में मौत की कॉलोनी लिए घूम रही थी क्योंकि रसल वाइपर इतनी घातक प्रजाति है जितना बड़ा सांप में जहर होता है उतना ही तुरंत जन्म देने वाले सपोले में भी होता है. अगर सपोला इंसान को काट ले तो उसकी भी कुछ ही मिनट में मौत हो सकती है क्योंकि यह जन्म से ही भयंकर जहर के साथ पैदा होते हैं.

बता दें कि सागर में पिछले 35 साल से सांप पकड़ने का काम कर रहे अकील बाबा बीते दिनों जहरीले प्रजाति के रसल वाइपर को लोधीपुरा से पकड़कर लाए थे, और उन्होंने इसे एक प्लास्टिक के डिब्बे में बंद करके रख दिया था ताकि वह इसे सुरक्षित और दूर जंगल में छोड़ आएंगे लेकिन जब अगले दिन पंचर बनाते समय उनकी नजर कुछ डिब्बे पर गई तो वह भी देखकर हैरान रह गए कि उन्होंने तो शाम को एक ही रसल वाइपर को रखा था यह अचानक इतनी सारी कहां से आ गए. जब उन्होंने देखा तो इनकी संख्या चार दर्जन से अधिक थी. एक दर्जन से अधिक सपोले तो रसल वाइपर के नीचे आने से ही दबकर मर गए थे फिर उन्होंने रसल वाइपर को अलग और बच्चों को अलग रखा फिर वन विभाग के साथ आमेट के जंगलों में जाकर छोड़ आए थे.

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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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