छतरपुर में क्यों पाले जाते हैं सबसे ज्यादा सुअर, ग्रामीणों ने बताई असल वजह

छतरपुर में क्यों पाले जाते हैं सबसे ज्यादा सुअर, ग्रामीणों ने बताई असल वजह


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Chhatarpur News: बैद्यनाथ पाल ने लोकल 18 को बताया कि छतरपुर जिले में सुअर पालन इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इसे मुनाफे का व्यवसाय माना जाता है. सुअर पालन में मुनाफा भैंस और बकरी पालन से भी ज्यादा है.

छतरपुर. 21वीं पशुगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में पशुओं के मामले में 5वीं सबसे बड़ी संख्या सुअरों की है. प्रदेश में सबसे अधिक सुअर छतरपुर में पाए गए. यहां इनकी संख्या 9,113 है. दूसरे नंबर पर 6,880 सुअरों के साथ सीधी और तीसरे नंबर पर रीवा है. जबकि झाबुआ में केवल 4 सुअर पाए गए हैं. इसी प्रकार बुरहानपुर और अलीराजपुर में भी सुअरों की संख्या 100 से भी कम है.

छतरपुर जिले के देवी दीन पाल लोकल 18 को बताते हैं कि छतरपुर में बड़ी संख्या में सुअर इसलिए पाले जाते हैं क्योंकि जिले में बसोर नाम की जाति की जनसंख्या बहुत ज्यादा है और यही एक जाति है, जो इसे पीढ़ियों से पालती आई है. आज भी यह जाति सुअर पालने का काम करती है. हालांकि जंगली सुअर भी यहां पाए जाते हैं, ये सुअर फसलों को चौपट भी करते हैं.

इसलिए पाले जाते हैं सुअर
वहीं बैद्यनाथ पाल लोकल 18 को बताते हैं कि छतरपुर जिले में सुअर पालन इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इसे मुनाफे का बिजनेस माना जाता है. सुअर पालन में मुनाफा भैंस-बकरी पालन से भी ज्यादा होता है. साथ ही सुअर पालन में खर्च भी कम आता है. इस जानवर को लोग छूने से डरते हैं, इसलिए चोरी होने का डर भी नहीं रहता है. लोग इसे ज्यादातर खुला छोड़कर रखते हैं.

कितनी है एक सुअर की कीमत?
देवी दीन पाल बताते हैं कि एक सुअर की कीमत 10 से 12 हजार रुपये होती है. 6 महीने का सुअर बच्चा भी 10 हजार रुपये में बिक जाता है.

1.80 करोड़ घरों में किया गया सर्वे
बता दें कि यह सर्वे प्रदेश में एक करोड़ 80 लाख पशुपालकों के घर-घर जाकर किया गया, जिसमें 5,264 गांव और 728 शहरी वार्ड शामिल थे. पशुगणना के लिए पशुपालन विभाग ने 970 सुपरवाइजर्स को नियुक्त किया था. इनमें 828 को ग्रामीण क्षेत्रों में और 142 सुपरवाइजर्स को शहरी क्षेत्रों में लगाया गया था, यानी करीब 3000 परिवारों पर एक सुपरवाइजर की नियुक्ति की गई थी.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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