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Agriculture News: डॉ कमलेश अहिरवार ने लोकल 18 से कहा कि किसान भाइयों को अगर डीएपी खाद नहीं मिलती है, तो वह एसएसपी खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह खाद सरसों की फसल के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. यह सस्ते दामों पर मिल जाती है.
छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ कृषि वैज्ञानिक डॉ कमलेश अहिरवार लोकल 18 को बताते हैं कि जिले में किसान अपनी फसल के लिए ज्यादातर डीएपी खाद का ही उपयोग करते हैं. सरसों फसल के लिए डीएपी और एसएसपी खाद अच्छी मानी जाती हैं. हालांकि इसके फायदे और नुकसान भी हैं. उन्होंने कहा कि फॉस्फेट में 18 फीसदी नाइट्रोजन और 46 फीसदी फॉस्फोरस की मात्रा होती है. पौधों की शुरुआती वृद्धि और जड़ों के विकास के लिए के लिए यह उपयोगी होता है. यह पौधों को हरा बनाता है. बीज अंकुरण में मदद करता है. हालांकि इसमें सल्फर नहीं होता है. लगातार उपयोग करने से मिट्टी में सल्फर और कैल्शियम की कमी हो जाती है.
उन्होंने आगे कहा कि एसएसपी खाद की बात करें, तो इसमें 16 फीसदी फॉस्फोरस, 12 फीसदी सल्फर और 20 फीसदी कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है. सरसों जैसी तेल वाली फसलों के लिए यह खाद सबसे उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि इस खाद के उपयोग से तेल की मात्रा बढ़ती है, साथ ही मिट्टी की संरचना में भी सुधार होता है. यह सस्ती भी होती है और सरसों फसल के लिए फायदेमंद भी होती है. हालांकि डीएपी की तुलना में इसमें फॉस्फोरस की मात्रा कम होती है और नाइट्रोजन भी नहीं होती है.
सस्ते दाम पर उपलब्ध खाद
डॉ कमलेश बताते हैं कि किसान भाइयों को डीएपी खाद नहीं मिलती है, तो वह एसएसपी खाद का उपयोग कर सकते हैं. यह सरसों फसल के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है, साथ ही यह खाद सस्ते दामों पर मिल जाती है.
सरसों का बोवनी सीजन
किसान देवी दीन पाल ने लोकल 18 से कहा कि कि सरसों की बोवनी का सीजन चल रहा है, इसलिए बोवनी के साथ खाद भी डाल रहे हैं. हम तो सालों से सरसों फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए डीएपी खाद डालते आ रहे हैं.
छतरपुर जिले के कृषि उप-संचालक डॉ रवीश सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि सरसों की फसल में किसान डीएपी और एसएसपी दोनों तरह की खाद का उपयोग करते हैं लेकिन असल में किसान भाइयों को खाद के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है, इसलिए वे दूसरों को देखकर ही अपनी फसल में खाद का उपयोग करते हैं. इस बार जिले में डीएपी, एसएसपी, एनपीके और यूरिया खाद पर्याप्त मात्रा में आई है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.