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Chana Farming Tips: मध्य प्रदेश के सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र में हुई बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह चना बुवाई का सही समय है. 5 नवंबर तक बोई गई फसल पर पाला नहीं पड़ता और इससे बंपर उत्पादन मिलता है.
Sagar News: पूरे बुंदेलखंड में अचानक मौसम में बदलाव हुआ और अच्छी बारिश हुई. कहीं-कहीं पर 1 से 2 इंच तक पानी भी गिरा. ऐसे में जिन किसानों के खेत खरीफ सीजन की फसलों से खाली हो गए थे और कम पानी होने की वजह से रवि सीजन में फसल लेने की चिंता सता रही थी उनकी टेंशन दूर हो गई है. बारिश होने की वजह से अब किसान जुताई करने के बाद चना की बुवाई कर सकते हैं और अपने खेत में अगर उन्होंने एक पानी भी अपनी फसल को दे दिया तो फिर इसे बंपर उत्पादन ले सकते हैं.
5 नवंबर तक चना की बुवाई
सागर कृषि विज्ञान केंद्र बिजोरा के प्रभारी डॉक्टर आशीष त्रिपाठी बताते हैं कि एक तो अभी बारिश हो गई है और दूसरा चना की बुवाई के लिए समय भी बहुत अच्छा चल रहा है. अगर किसान 5 नवंबर तक चना की बुवाई कर देते हैं तो उन्हें सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जल्दी बुवाई होने से अधिक ठंड पड़ने की वजह से जो पाला लगने की संभावना होती है वह न के बराबर रह जाती हैं. चना की फसल ऐसी होती है जिसके कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं और बाजार में भी अब अच्छे भाव मिलने लगे हैं, जो किसान चना की खेती करते हैं या वह करने जा रहे हैं तो उनके लिए 10 ऐसी वैरायटी बता रहे हैं. जिनका उपयोग कर वे अपनी फसल से बंपर उत्पादन ले सकते हैं.
जवाहर चना 18, जवाहर चना 52, पूसा मानव यह चना की नई वैरायटी हैं. इसके अलावा जवाहर चना 36, RVG 202, RVG 203, RVG 204 भी अच्छी वैरायटी हैं. पुरानी वैरायटी में जेजी 16 , jg 63 है. सागर और बुंदेलखंड में इसके अलावा कुछ पुरानी किस्म भी हैं जो आज भी प्रचलित हैं. इनसे उत्पादन भी बेहतर मिलता है. इसमें Jg 315, JG 322 भी अच्छी वैरायटी हैं, जिनका उपयोग किया जा रहा है.
कृषि एक्सपर्ट की सलाह
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर आशीष त्रिपाठी बताते हैं कि बारिश होने की वजह से अब खेत में पलेवा करने की जरूरत नहीं है, केवल जुताई करें और फिर चना की बुवाई चार से पांच इंच की गहराई पर करें बुवाई करने से पहले इनका किसी भी फफूंदनाशी से बीज उपचार करना चाहिए. चना में बुवाई करते समय राइबोजियम का इस्तेमाल करें, क्योंकि चना में जो जड़ होती है उसमें छोटी-छोटी गांठ बनती हैं जिसमें नाइट्रोजन फिक्स होता है और यह अगली फसल के लिए काफी मददगार होता है.
Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें
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