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टी20 वर्ल्ड कप में अब सिर्फ तीन महीने बचे हैं, ऐसे में यह भारत के लिए नई चीज़ें आज़माने और संयोजन को परखने का सबसे बेहतर मौका है. एशिया कप जैसी टूर्नामेंटों में जहाँ दबाव अलग किस्म का था, वहाँ इस सीरीज़ में सूर्यकुमार यादव और गौतम गंभीर के पास साहसिक फैसले लेने का मौका है.
नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 सीरीज कई सवालों के जवाब ढूढने का एक बड़ा जरिया बन सकती है मसलन क्या हार्दिक पांड्या की अनुपस्थिति में नितीश कुमार रेड्डी को लगातार मौके मिलेंगे या फिर वाशिंगटन सुंदर को. क्या हर्षित राणा को मौका मिलेगा और सूर्यकुमार यादव और शुभमन गिल को कितनी सख्त जरूरत है रन बनाने की. ऑस्ट्रेलिया में होने वाली टी20 सीरीज़ इन सभी सवालों के जवाब देगी.
हर जगह पर है लड़ाई
मिडिल ऑर्डर में रिंकू सिंह के उदाहरण से बात शुरु करे तो उन्होंने एशिया कप में सिर्फ एक गेंद खेली थी और चौका लगाकर मैच खत्म किया था वह एक शानदार फील्डर हैं पर क्या उन्हें मिडिल ऑर्डर में स्थायी मौका मिलना चाहिए या शिवम दुबे को जिन्होंने एशिया कप में अच्छा प्रदर्शन किया. हार्दिक पांड्या की अनुपस्थिति में नितीश कुमार रेड्डी को ‘लाइक-फॉर-लाइक’ रिप्लेसमेंट के रूप में आजमाया जा सकता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या सूर्य को उनके गेंदबाज़ी कौशल पर उतना ही भरोसा है. एशिया कप में हार्दिक ने गेंद और बल्ले दोनों से अहम भूमिका निभाई थी, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कप्तान और कोच मिलकर नितीश का उपयोग किस तरह करते हैं.
कप्तान उपकप्तान की बल्लेबाजी फॉर्म
अब बात कप्तान सूर्यकुमार यादव और उपकप्तान शुभमन गिल की. दोनों के लिए रन बनाना बेहद ज़रूरी है ताकि आत्मविश्वास बना रहे. गिल ने तीसरे वनडे में कुछ लय पकड़ी थी, लेकिन हाल के समय में सफेद गेंद से बड़ी पारी नहीं खेल पाए हैं ऑल-फॉर्मेट कप्तान के रूप में उन्हें प्रदर्शन से उदाहरण पेश करना होगा. यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ी बेंच पर तैयार हैं, ऐसे में अगर गिल का फॉर्म नहीं लौटा तो दबाव बढ़ेगा. सूर्यकुमार ने भी एशिया कप में बल्ले से खास प्रदर्शन नहीं किया. हालांकि उनकी कप्तानी सराही गई, लेकिन भारत को अपने कप्तान से रन भी चाहिए. नंबर 3 पर बल्लेबाज़ी करते हुए सूर्य जानते हैं कि उन्हें लगातार रन बनाने होंगे ताकि टीम पर पकड़ बनी रहे. भारत के पास सफेद गेंद के इतने विकल्प हैं कि कुछ खराब पारियाँ भी सुर्खियाँ बन सकती हैं.
बॉलिंग डिपार्टमेंट में भी बवाल कम नहीं
गेंदबाज़ी की बात करें तो यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत वाशिंगटन सुंदर को ऑलराउंड विकल्प के रूप में नितीश से ऊपर रखता है या नहीं. घरेलू परिस्थितियों में होने वाले वर्ल्ड कप को देखते हुए सुंदर उपयोगी साबित हो सकते हैं वह पावरप्ले में गेंदबाज़ी कर सकते हैं और नीचे आकर कुछ रन भी जोड़ सकते हैं, जिससे वह अक्षर पटेल, कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती के साथ अच्छा संतुलन बना सकते हैं. जसप्रीत बुमराह की वापसी के साथ तेज़ गेंदबाज़ी की ज़िम्मेदारी उनके और अर्शदीप सिंह के कंधों पर होगी हालांकि हर्षित राणा ने तीसरे वनडे में अच्छा प्रदर्शन किया था, और उनकी बल्लेबाज़ी क्षमता उन्हें निचले क्रम में एक उपयोगी विकल्प बनाती है. सीरीज़ के आगे बढ़ने के साथ भारत उन पर प्रयोग करता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी. यह सीरीज़ वनडे से अधिक अहम है, क्योंकि यहीं से वर्ल्ड कप का खाका उभर कर आएगा इसलिए रोहित और कोहली के बिना भी इसमें दिलचस्पी की कोई कमी नहीं होगी.