रायसेन में मंगलवार को भगवान सहस्रबाहु अर्जुन की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। हैहय क्षत्रिय कलचुरी समाज की ओर से शगुन गार्डन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में भगवान की पूजा-अर्चना, सामूहिक आरती और सम्मान समारोह हुआ। समाजबंधुओं ने भगवान सहस्रबाहु अर
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कार्यक्रम की शुरुआत भगवान सहस्रबाहु अर्जुन की आरती से हुई। इस दौरान समाज के वरिष्ठों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों को शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। मंच पर बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसके बाद समाजबंधुओं के लिए स्नेह भोज का आयोजन किया गया।
‘रावण को किया था पराजित, नर्मदा के तट पर रोकी थी नदी का बहाव’
कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान सहस्रबाहु अर्जुन की वीरगाथा सुनाते हुए बताया कि उन्होंने लंकापति रावण को पराजित कर बंदी बनाया था। कहा कि नर्मदा तट पर सहस्रबाहु अर्जुन ने अपनी हजार भुजाओं से नदी का बहाव रोक दिया था, जिससे रावण क्रोधित होकर युद्ध करने पहुंचा। युद्ध में रावण अचेत होकर भूमि पर गिर पड़ा, जिसके बाद सहस्रबाहु ने उसे बंदी बनाकर रखा और बाद में मुक्त कर दिया।
महाभारत, भागवत और अन्य पुराणों में सहस्रबाहु अर्जुन का उल्लेख मिलता है। वे हैहय वंश के राजा कृतवीर्य और माता पद्मिनी के पुत्र थे। भगवान दत्तात्रेय की तपस्या से उन्हें हजार भुजाएं और दस दिव्य वरदान प्राप्त हुए, इसी कारण वे सहस्रबाहु अर्जुन के नाम से प्रसिद्ध हुए।
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