रेलवे का नया ‘फूड फॉर्मूला’-च्वॉइस या मजबूरी?: IRCTC ने इंटरफेस बदला, ‘नो फूड’ ऑप्शन अब नीचे छिपा; यात्री बोले रेलवे जबरन खिला रही है – Bhopal News

रेलवे का नया ‘फूड फॉर्मूला’-च्वॉइस या मजबूरी?:  IRCTC ने इंटरफेस बदला, ‘नो फूड’ ऑप्शन अब नीचे छिपा; यात्री बोले रेलवे जबरन खिला रही है – Bhopal News


राजधानी, शताब्दी और दूरंतो जैसी VIP ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाली ऑन बोर्ड कैटरिंग सुविधा का इतिहास दशकों पुराना है। लेकिन अब यात्रियों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। IRCTC की वेबसाइट और ऐप पर टिकट बुक करते समय “नो फूड” का विकल्प अब पहले की

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कब शुरू हुई ऑन बोर्ड कैटरिंग की सुविधा राजधानी एक्सप्रेस जब पहली बार चली थी, तभी इसके साथ ऑन बोर्ड कैटरिंग की सुविधा जोड़ी गई थी। यात्रियों को टिकट के साथ ही नाश्ता, लंच और डिनर दिया जाता था। यह रेलवे की प्रीमियम सर्विस का हिस्सा था और सालों तक सफलतापूर्वक चला। यात्रियों को ट्रेन का खाना पसंद भी आता था। लेकिन 2010 के बाद खाने की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें आने लगीं। यात्रियों ने मंत्रालय से लेकर सोशल मीडिया तक विरोध जताया, जिसके बाद तत्कालीन रेल मंत्री ने हस्तक्षेप कर सुधार के आदेश दिए।

राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों के यात्रियों को हो रही असुविधा।

2017 में शुरू हुआ था ‘नो फूड’ ऑप्शन

IRCTC के ऐप पर नो फूड का विकल्प नहीं दिख रहा है।

IRCTC के ऐप पर नो फूड का विकल्प नहीं दिख रहा है।

एक अगस्त 2017 को रेलवे बोर्ड ने निर्णय लिया कि राजधानी, शताब्दी और दूरंतो ट्रेनों में यात्रियों को ‘नो फूड’ का विकल्प दिया जाएगा। यात्री यदि ट्रेन का खाना नहीं लेना चाहता, तो वह टिकट बुकिंग के दौरान “No, I don’t want food” चुन सकता था। इससे टिकट से भोजन का चार्ज अपने आप घट जाता था। यह व्यवस्था यात्रियों के बीच लोकप्रिय हुई, क्योंकि कई यात्री अपना खाना साथ लाना पसंद करते हैं।

अब क्या बदला, अक्टूबर में हुआ इंटरफेस अपडेट हमने खुद इस मामले का रियलिटी चेक किया। अक्टूबर की शुरुआत में आईआरसीटीसी ने वेबसाइट और ऐप के इंटरफेस में बदलाव किया है। पहले जो “नो फूड” का ऑप्शन टिकट बुकिंग पेज पर स्पष्ट दिखता था, अब उसे “Catering Service Option” के ड्रॉपडाउन में नीचे की ओर शिफ्ट कर दिया गया है।

यह बदलाव इतना सूक्ष्म है कि जल्दी-जल्दी टिकट बुक करने वाले यात्री इसे देख ही नहीं पाते। कई को यह लगता है कि विकल्प हटा दिया गया है और मजबूरी में फूड चार्ज जोड़कर टिकट कन्फर्म करना पड़ता है।

अक्टूबर माह के शुरुआत में हुआ इंटरफेस में बदलाव।

अक्टूबर माह के शुरुआत में हुआ इंटरफेस में बदलाव।

यात्रियों ने जताई नाराजगी, बोले-मजबूरी में खाना लेना पड़ रहा है

यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए बदलाव इस मामले में IRCTC के पीआरओ एके सिंह ने बताया “रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार IRCTC ने यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से ई-टिकटिंग इंटरफेस में संशोधन किए हैं। ‘Catering Service Option’ के तहत अब ड्रॉपडाउन मेनू में शाकाहारी, मांसाहारी, जैन भोजन, डायबिटिक शाकाहारी और डायबिटिक मांसाहारी विकल्प शामिल किए गए हैं। उन्होंने आगे बताया “‘No, I don’t want food’ (मुझे भोजन नहीं चाहिए) विकल्प अब ‘Payment Mode’ फील्ड के ठीक पहले दिखेगा।

टिकट आगे बढ़ाने से पहले यात्री को या तो कोई फूड टाइप चुनना होगा या ‘नो फूड’ विकल्प को सिलेक्ट करना अनिवार्य होगा। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि यात्रियों को इस बदलाव की जानकारी कैसे दी गई, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा “यह रेलवे की पॉलिसी के अनुसार किया गया है।” यानी आईआरसीटीसी ने बदलाव तो मान लिया, लेकिन सूचना प्रसार पर जवाब देने से बचते दिखे।

IRCTC ने कहा कि रेलवे बोर्ड की पॉलिसी के अनुसार किया बदलाव।

IRCTC ने कहा कि रेलवे बोर्ड की पॉलिसी के अनुसार किया बदलाव।

यात्रियों का कहना, पारदर्शिता जरूरी

यात्रियों का कहना है कि यह बदलाव पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। पहले “नो फूड” विकल्प आसानी से दिखता था, अब वह छिप गया है। इससे यात्रियों को यह भ्रम होता है कि ऑप्शन खत्म कर दिया गया है।

कुछ लोगों का कहना है कि यह कदम यात्रियों की “राइट टू चॉइस” का उल्लंघन है। रेलवे को यात्रियों की जरूरत और सुविधा के मुताबिक बदलाव करने चाहिए, न कि उन्हें बिना जानकारी के नई नीति में फंसा देना चाहिए।

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