पराली का ऐसे होगा निपटारा, पैसे मिलेंगे सो अलग…ये मशीनें कर रहीं काम आसान

पराली का ऐसे होगा निपटारा, पैसे मिलेंगे सो अलग…ये मशीनें कर रहीं काम आसान


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Agriculture News: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पराली को नियंत्रित करने के लिए अब कई एडवांस मशीनें आ गई हैं. बेलर और रैक जैसी मशीनें खेतों में बची पराली को जमा कर उसका बंडल बनाने का काम करती हैं. किसान भाई इन बंडलों को बाजार में व्यावसायिक रूप से बेच सकते हैं या पशुओं के चारे के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं.

सतना. धान की कटाई के सीजन में किसानों के लिए राहत की बात यह है कि अब आधुनिक तकनीक खेती का रूप बदल रही है. खेतों में पराली जलाने की समस्या के बीच अब ऐसी मशीनें बाजार में आ चुकी हैं, जो किसानों का काम आसान बनाने के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा भी कर रही हैं. कंबाइन हार्वेस्टर, रीपर बाइंडर और वर्टिकल कन्वेयर रीपर जैसी आधुनिक मशीनें न केवल कटाई में समय बचा रही हैं बल्कि उत्पादन क्षमता को भी कई गुना बढ़ा रही हैं. इन मशीनों की मदद से किसान कम मेहनत में अधिक लाभ कमा पा रहे हैं.

पराली जलाना बन रहा नुकसान का सौदा
धान की फसल पकने के बाद कटाई के दौरान खेत में बचे अवशेष यानी पराली को किसान परंपरागत तौर पर जला देते हैं. इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है क्योंकि इसमें वायु प्रदूषण फैलता है और यह हवा में हानिकारक गैसें छोड़ता है लेकिन इससे भी अधिक नुकसान मिट्टी की उत्पादकता को होता है. सतना के कृषि संभागीय यंत्री कार्यालय में अधिकारी एसके नारनौरे ने लोकल 18 को बताया कि पराली जलाने से मिट्टी में रहने वाले मित्र कीट जैसे केंचुए और उपयोगी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जो फसलों की उर्वरक क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं.

नई तकनीक से खेती में क्रांति
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पराली को नियंत्रित करने के लिए अब कई आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं. बेलर और रैक जैसी मशीनें खेतों में बची पराली को इकट्ठा कर उसका बंडल बनाने का काम करती हैं. किसान इन बंडलों को बाजार में व्यावसायिक रूप से बेच सकते हैं या पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं सुपर सीडर नामक मशीन पराली को मिट्टी में मिलाकर उसके ऊपर सीधे बीज बोने का काम करती है. इससे पराली खाद में बदल जाती है और खेत की उर्वरता बढ़ती है.

इन तकनीकों से न केवल पर्यावरण प्रदूषण कम होगा बल्कि किसानों को आर्थिक फायदा भी होगा. नई तकनीक अपनाकर किसान अपनी जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ा सकते हैं और टिकाऊ खेती की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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