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Green Fodder For Animals: सर्दी के मौसम में किसानों के पास मवेशी को हरा चारा खिलाने की समस्या रहती है. इसलिए किसान कुछ खास किस्म के हरा चारा की खेती कर सकते हैं. इसमें नेपियर, ज्वार, बरसीम सहित अन्य शामिल है. ये हरा चारा की वैरायटी पशुओं को स्वस्थ रखने साथ दूध उत्पादन को भी बढ़ाने में कारगर है.
यदि आप एक पशुपालक हैं और सर्दियों में पशुओं के चारे की चिंता से परेशान हैं, तो आज हम आपको कुछ ऐसे घास के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी खेती मुख्य रूप से सर्दियों में ही की जाती है.

खास बात यह है कि ये घास महज 2 महीने में उग कर तैयार हो जाते हैं और इसका पशु चारे के रूप में इस्तेमाल बेहद ही लाभप्रद माना जाता है. जानकार बताते हैं कि पशुपालक इन घासों को एक बार लगाकर अगले 5 वर्षों तक उपयोग में ला सकते हैं.

छतरपुर नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ कृषि वैज्ञानिक डॉ. कमलेश अहिरवार ने लोकल 18 को बताया कि नेपियर घास पशुपालक किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है. खास बात यह है कि बुवाई के सिर्फ 2 महीने बाद ही यह कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके चारे में प्रोटीन और विटामिन की भरपूर मात्रा पाई जाती है.

नेपियर घास को पशुओं का उत्तम आहार भी कहा जाता है. दुधारु पशुओं को लगातार नेपियर घास खिलाने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे वह तंदुरूस्त रहते हैं तथा दूध उत्पादकता को बढ़ाते हैं.

बता दें कि आप इस घास को सर्दी के सीजन में लगा सकते हैं. अच्छी बात यह है कि इसकी खेती सूखे-बंजर इलाकों में भी की जा सकती है. इतना ही नहीं, किसान इसे अपने खेत की मेड़ों पर भी उगा सकते हैं. यह घास साल भर तक हरा चारा मुहैया कराने वाली बहुवर्षीय हरा चारा फसल है. इसे एक बार उगाकर लगातार 4 से 5 साल तक पशुओं के लिए चारे की आपूर्ति की जा सकती है.

डॉ. कमलेश ने लोकल 18 को बताया कि मवेशियों को ज्वार का चारा खिलाने से उनके शरीर में पानी की कमी की पूर्ति होती है. इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जिसे चारे के रूप में खाने से उनमें दूध उत्पादकता को बढ़ोत्तरी मिलती है.

बरसीम घास पशुओं के भोजन में बहुत पॉपुलर हरे चारे की फसल है. यह बहुत ही पौष्टिक व स्वादिष्ट होती है. यही कारण है कि पशु इसे खाना सबसे अधिक पसंद करते हैं तथा किसानों द्वारा भी इसे पशुओं के लिए हरे चारे के रूप में प्रमुखता से उगाया जाता है.

डॉ. कमलेश बताते हैं कि इसमें पाचन शीलता 75 फीसदी तक होती है. इसके चारे में रेशे की मात्रा कम व प्रोटीन की मात्रा 20 से 21 फीसदी तक होती है. बरसीम घास पशुओं को बिल्कुल स्वस्थ रखती है तथा उनके सेहत के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन की क्षमता को बनाए रखने में फायदेमंद है. बरसीम की बुवाई अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में की जाती है तथा हर चालीस दिन पर ये कटाई करने लायक हो जाती है.