धार जिले के नालछा क्षेत्र में अवैध धर्मांतरण के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला केवल आठ महीने में सुनाया गया, जो त्वरित न्याय का उदाहरण बना।
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कोर्ट ने आरोपी जंगलिया पिता भोल्या निवासी ग्राम बिल्याक देह और नानुराम पिता रतन निवासी मवड़ीपुरा को दोषी पाते हुए एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
ग्रामीणों को दिया नौकरी का लालच दिया
अतिरिक्त शासकीय लोक अभियोजक शरद कुमार पुरोहित ने बताया कि 8 सितंबर 2024 को ग्राम मवड़ीपुरा में आरोपी जंगलिया ने ग्रामीण पप्पू और अन्य लोगों से कहा था कि हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाओ, बीमारियां दूर होंगी और घर में सुख-शांति रहेगी। उसने ग्रामीणों को अपने साथी नानुराम से मिलने को कहा। नानुराम ने बताया कि वह पहले ही ईसाई धर्म अपना चुका है और दूसरों को भी बैठकों में शामिल होने और हिंदू देवी-देवताओं की पूजा बंद करने की सलाह दी।
बीमार होने पर 50 हजार और नौकरी का वादा
आरोपियों ने लोगों को बहलाने के लिए कहा कि अगर कोई बीमार हुआ तो चर्च से 50 हजार रुपये मिलेंगे और 15 से 20 हजार रुपये की नौकरी दिलवाई जाएगी।इसकी शिकायत ग्रामीणों ने नालछा थाने में की, जहां मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ। पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र अदालत में पेश किया।
कोर्ट ने सुनाई सजा, भेजा गया जेल
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। आरोपी पहले से सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर थे। अब अदालत ने सजावारंट जारी कर उन्हें जेल भेज दिया है।