आरोपी पटवारी जितेन्द्र सिंह राणावत पर 15 हजार जुर्माना भी लगा।
उज्जैन लोकायुक्त ने तीन साल पहले 7,000 रुपए की रिश्वत मांगने वाले पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की थी। लोकायुक्त टीम ने पटवारी को रंगे हाथों पकड़ा था। भ्रष्टाचार के मामले में विशेष न्यायालय, उज्जैन ने बुधवार को आरोपी पटवारी जितेन्द्र सिंह राणावत, तत्कालीन
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लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव को बेरछा निवासी विश्वप्रताप सिंह पंवार ने 18 जून को शिकायत की थी। विश्वप्रताप सिंह ने माता ललिता कुंवर के नाम से दो अलग-अलग कृषि भूमि के सीमांकन के लिए आवेदन किया था। इसके एवज में पटवारी जितेन्द्र राणावत ने उनसे 10,000 रुपए की मांग की, जिसमें से तीन हजार रुपए पहले ही ले चुका था। सीमांकन के बाद भी पटवारी ने रिपोर्ट तहसील कार्यालय में पेश नहीं की।
नाराज पंवार ने लोकायुक्त को शिकायत की, जिसके बाद निरीक्षक श्रीवास्तव को मामले की जांच सौंपी गई। 20 जून को लोकायुक्त की टीम ने नागदा पहुंचकर वाइस रिकॉर्डिंग की। इसके बाद 7 जुलाई 2022 को जितेन्द्र सिंह राणावत को 7,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
जेल भेजा गया आरोपी
विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, उज्जैन ने पटवारी को दोषसिद्ध कर चार वर्ष सश्रम कारावास और 15,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। इसके बाद आरोपी को भैरूगढ़ जेल भेज दिया गया।
लोकायुक्त संगठन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार पाठक (डी.पी.ओ.) ने प्रकरण में अभियोजन का संचालन किया। आरक्षक संजीव कुमारिया ने अभियोजन संचालन में सहयोग दिया।