Last Updated:
Indore News: नेपियर घास के इस्तेमाल से दूध उत्पादन बढ़ा है और लागत में कमी आई है. इस किस्म की नेपियर घास की पत्तियों में धार कम है, अक्सीलेट्स कम है. वहीं विटामिन और टीडीएन वैल्यू ज्यादा मिली है. इसका मतलब है कि इसमें सुपाच्य पोषक तत्व बहुत ज्यादा मात्रा में पाए गए. इससे कम खर्च और कम मेहनत में किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ी है.
इंदौर. किसानों और पशुपालकों के बीच नेपियर घास काफी लोकप्रिय हो रही है. नेपियर घास पशुओं के लिए बेहतर चारा है. इसे हाथी घास के नाम से भी जाना जाता है. नेपियर घास ज्यादा पौष्टिक और उत्पादक होती है. इस घास के सेवन से पशुओं में दूध उत्पादन बढ़ता है, साथ ही यह घास पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. नेपियर घास से सीएनजी और कोयला बनाने की तकनीक पर काम चल रहा है. इससे किसानों को भी कम खर्च में शानदार कमाई का मौका मिलेगा.
खेत की मेड़ों पर उगाएं नेपियर घास
देश में नेपियर घास की खेती रबी की फसल की कटाई के बाद खरीफ मौसम में और फरवरी-मार्च में की जाती है. इसकी खेती ज्यादा बारिश या सूखे-बंजर इलाकों में भी की जा सकती है. किसान चाहें तो खेत की मेड़ों पर नेपियर घास की खेती कर सकते हैं. नेपियर में 55 से 60 फीसदी ऊर्जा तत्व और 8 से 10 प्रतिशत प्रोटीन होता है.
हर तीन महीने में 20 टन घास
एक बार बुवाई करने के बाद यह लगातार पांच साल तक उगती रहती है. हर दो से तीन महीने में घास की ऊंचाई 15 फीट हो जाती है. नेपियर घास को बार-बार निराई, गुड़ाई या रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जरूरत भी नहीं होती है. बेहद कम खर्च में तैयार होने वाली इस घास से हर तीन महीने में एक बीघा में कटाई से किसान 20 टन से ज्यादा घास ले सकते हैं. इससे किसान को सालाना एक बीघा से एक लाख रुपये तक कमाई हो सकती है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.