रतलाम में कदमताल करते निकले नन्हें स्वयंसेवकों पर लोगों ने पुष्पवर्षा की।
राष्ट्रीय सेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आरएसएसएस ने रविवार शाम शहर में शिशु पथ संचलन निकाला। घोष की ध्वनि के साथ संघ की गणवेश पहन अनुशासन का पालन करते हुए नौनिहालों ने सड़क पर कदम ताल किया। नन्हें कदमों की कदम ताल को देखने हर कोई रुक गया।
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सामाजिक संगठनों, लोगों, संस्थाओं ने बाल शिशु पथ संचलन शहर के माणकचौक स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल से निकला। पथ संचलन में नन्हें स्वयंसेवकों के पालक भी शामिल हुए। संघ की गणवेश में नौनिहालों के अनुशासन में कदमताल करते हुए सड़कों पर भारत माता के जयकारे से लगे।
मुख्य वक्ता नगर बाल कार्य प्रमुख अर्पित गुप्ता एवं नगर सह कार्यवाह मनोज सगरवंशी मंचासीन रहे।
हाथों में लाठी लेकर रतलाम की सड़क से निकले बाल स्वयंसेवक।

बाल स्वयंसेवकों का माणकचौक स्थित शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में एकत्रीकरण हुआ।
मुख्य वक्ता अर्पित गुप्ता ने अपने बौद्धिक में संघ की 100 वर्ष की यात्रा के विषय में बताया। उन्होंने कहा कि कहा कि हमारी संस्कृति में श्रेष्ठ को ही योग्यता के आधार पर स्थान मिलता है। गुरु नानक देव जी ने अपने पुत्र की अपेक्षा अपने शिष्य भाई लहना जी को अपना उत्तराधिकारी बनाया जो आगे चलकर सिख पंथ के दूसरे गुरु अंगद देव जी कहलाए।
इन मार्गों से निकला शिशु पथ संचलन माणकचौक हायर सेकेंडरी से गणेश देवरी, धानमंडी रानी जी का मंदिर, नाहरपुरा चौराहा, डालूमोदी बाजार, दौलतगंज होते हुए माणकचौक महालक्ष्मी मंदिर होते पुन: स्कूल में समापन हुआ। शिशु पथ संचलन में शिशु स्वयंसेवकों को गणवेश में बड़ी संख्या में नगरवासियों ने देखने पहुंचे।
देखिए शिशु पथ संचलन की तस्वीरें…


