बालाघाट. 1967 से शुरू हुआ नक्सलवाद (Naxal Surrender Benefits) अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है. महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश में नक्सली सरेंडर की राह पर हैं. छत्तीसगढ़ के बीजापुर की रहने वाली सुनीता साल 2022 में माओवादी मूवमेंट में शामिल हुई थी. वह बालाघाट से 110 किलोमीटर दूर चौरिया कैंप पहुंची और आत्मसमर्पण कर दिया. ऐसे में हर राज्य में सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए एक पॉलिसी है. आईजी संजय सिंह का कहना है कि मध्य प्रदेश की नक्सल सरेंडर पॉलिसी सबसे अच्छी है. ऐसे में आपके मन में भी सवाल उठ रहा होगा कि अगर नक्सली सरेंडर करते हैं, तो उन्हें कितना फायदा होता है. सबसे पहले हम आपको बालाघाट में जिस महिला नक्सली ने सरेंडर किया है, उसके बारे में बताते हैं.
पुलिस ने दो नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी कि लांजी थाना क्षेत्र के चौरिया कैंप में हार्डकोर सशस्त्र नक्सली सुनीता ओयाम ने सरेंडर किया है. बताया जाता है कि उसके पिता भी पूर्व नक्सली थे. सुनीता मलाजखंड दर्रेकसा दलम में एसीएम यानी एरिया कमेटी मेंबर के पोस्ट पर थी. वह इंसास रायफल के साथ सशस्त्र नक्सली संगठन में बालाघाट, गोंदिया और राजनांदगांव डिवीजन में सक्रिय थी. उस पर 14 लाख रुपये का इनाम था.
सुनीता साल 2022 में महज 20 साल की उम्र में नक्सली संगठन से जुड़ी थी. उसने छत्तीसगढ़ के माड क्षेत्र में 6 महीने की ट्रेनिंग ली. इसके बाद वह सेंट्रल कमेटी के मेंबर रामदेर की सिक्योरिटी के रुप में काम कर रही थी. आपको बता दें कि वह छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ तहसील के गोमवेटा गांव की रहने वाली है. हालांकि उसने नक्सलवाद की राह क्यों चुनी, इसकी जानकारी पुलिस ने नहीं दी है.
पुलिस ने बताया कि वह हाल के दिनों में रामदेर के ग्रुप के 11 सदस्यों के साथ बालाघाट आई थी. सूत्रों के मुताबिक, सुनीता के साथ उसके रिश्ते को लेकर नक्सल समूह में उसकी बदनामी हो रही थी. ऐसे में सुनीता ने सरेंडर करने का निर्णय लिया. लोकल 18 ने एसपी आदित्य मिश्रा से इस बात की सत्यता के बारे में पूछा और उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया.
संगठन से बचकर आई सुनीता
31 अक्टूबर की सुबह-सुबह वह चुपचाप अपने हथियार, वर्दी और बैग लेकर समूह से अलग हो गई. पुलिस कैंप के पास पहुंचने से पहले उसने अपनी यूनिट की नजरों से बचने के लिए अपनी इंसास राइफल, मैगजीन और माओवादी किट जंगल के एक ढेर में छिपा दी. फिर वह जंगल से होते हुए कई किलोमीटर पैदल चलकर चौरिया हॉक फोर्स कैंप पहुंची, जहां उसने आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई.
अब मिलेंगे लाखों रुपये
सरेंडर करने वाली महिला नक्सली सुनीता को मध्य प्रदेश आत्मसमर्पण, पुनर्वास सह राहत नीति 2023 के तहत इनामी राशि 14 लाख रुपये, इंसास हथियार छोड़ने के साढ़े तीन लाख रुपये और 20 लाख रुपये जमीन खरीदने के लिए मिलेंगे. इतना ही नहीं, सुनीता को डेढ़ लाख रुपये घर बनाने के लिए और शादी करने के लिए भी 50 हजार रुपये भी मिलेंगे. वह अगर पढ़ाई करना चाहती है, तो डेढ़ लाख रुपए और मिलेंगे. वहीं उसे सरकारी नौकरी भी मिलेगी.