जबलपुर में जहां से निकलना था सोना… वहां जमीन के नीचे दफन मिले जंगली सूअर, तेंदुआ, जांच में खुले कई राज

जबलपुर में जहां से निकलना था सोना… वहां जमीन के नीचे दफन मिले जंगली सूअर, तेंदुआ, जांच में खुले कई राज


Jabalpur News: जबलपुर का सिहोरा क्षेत्र शिकारियों का गढ़ बनता जा रहा है. जी हां, ये वही सिहोरा है, जहां सोने की खदान मिलने का दावा किया गया था. लेकिन, अब तक यहां सोना तो नहीं मिला, बल्कि जंगली जानवर सहित तेंदुए के शव मिलने शुरू हो गए हैं. कहीं, करंट लगाकर जंगली सूअर और तेंदुओं को मारा जाता है तो कभी इन्हीं तेंदुओं की खाल और नाखून को बेचा जाता है. आखिर शिकारियों को यह इलाका इतना क्यों भा रहा है? यह साजिश है या इत्तेफाक? घटना ऐसी कि अब वन विभाग के भी छूट रहे हैं पसीने…देखिए रिपोर्ट

जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर तहसील सिहोरा है. यहां चंद महीने पहले कई क्विंटल सोना मिलने का दावा किया गया था, लेकिन अब उसी क्षेत्र में जब वन विभाग ने खुदाई की, तब सोना तो नहीं बल्कि जंगली सूअर निकलना शुरू हो गए. दरअसल, पूरा मामला सिहोरा स्थित निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड का है. यह फैक्ट्री करीब 250 एकड़ में है. जहां पोल्ट्री फार्म से लेकर खेती की जाती है. चंद दिन पहले ही वन विभाग को इसी फार्म हाउस की जमीन से करीब 10 फीट नीचे जंगली सूअरों के शव मिले थे. जिसके बाद वन विभाग एक्शन में आया था. जांच आगे बढ़ते ही कुछ दिनों बाद ही यहां तेंदुए का शव भी मिल गया.

नहीं सुलझ रही गुत्थी, जांच का दायरा बढ़ा
पूरे मामले में जब तेंदुए का पोस्टमार्टम कराया गया, तब साफ हुआ कि तेंदुआ की मौत नहीं हुई, बल्कि तेंदुआ को मारा गया था. उसको करंट लगाया गया था. इतना ही नहीं, तेंदुआ का शिकार कर तेंदुए के 17 नाखून और 4 दांतों को भी निकाल लिया गया था. फिर क्या था वन विभाग की टीम हरकत में आई और अब टीम के अलावा टीएसएफ यानी टाइगर स्ट्राइक फोर्स भी मामले की जांच कर रही है. जहां जांच में कई नए मोड़ सामने आए हैं.

हाईप्रोफाइल मामला, वन विभाग के छूट रहे पसीने 
वहीं, अब वन विभाग के भी पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि 250 एकड़ के इस एरिया में जांच करना इतना आसान नहीं है. हालांकि, डॉग स्क्वॉड को पूरे क्षेत्र में छोड़ दिया गया है. ग्रामीणों को इस एरिया में नहीं आने दिया जा रहा है. इसके कारण वन विभाग की भी चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं. लेकिन अब इस मामले में स्वतंत्र एजेंसी टाइगर स्ट्राइक फोर्स की एंट्री हुई है, जो मामले की जांच कर रही है. वजह सिर्फ इतनी है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारी और अधिकारी भी शक के दायरे में आ चुके हैं.

लोकल 18 पड़ताल में ये पता चला… 
हालांकि, पूरे मामले में जब लोकल 18 ने पड़ताल की, तब कुछ नए तथ्य सामने आए. मृत तेंदुआ राजनीति का शिकार होता नजर आ रहा है. तेंदुए को मारकर फैक्ट्री के नजदीक लाया गया. जब लोकल 18 की टीम ने जबलपुर डीएफओ ऋषि मिश्रा से बातचीत की, तब उन्होंने स्वीकार किया मुखबिर से इसकी जानकारी मिली, न ही गार्ड ने जानकारी दी और न ही स्थानीय लोगों ने. मतलब साफ है साजिश कर तेंदुए को मारकर फेंक दिया गया.

सभी शक के दायरे में, जल्द खुलेगा राज
जांच के दौरान वन विभाग के दो अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, जिन्हें निलंबित भी कर दिया गया था. लेकिन कुछ अधिकारियों की अब भी भूमिका संदिग्ध है. इसके अलावा फार्म हाउस के गार्ड की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है, क्योंकि 250 एकड़ के क्षेत्र में पहरा होने के बाद भी आखिर कैसे घटना घट गई. इतना ही नहीं, पड़ताल में यह भी पता चला कि फैक्ट्री परिसर में सीसीटीवी लगे थे, जिससे राज खुलने की संभावना थी. लेकिन, सीसीटीवी भी बंद हैं.

फार्म हाउस मलिक गोयनका से जल्द पूछताछ
फैक्ट्री के मालिक महेंद्र गोयनका भी अब वन विभाग के टारगेट में हैं. जल्द ही पूछताछ की जाएगी. फैक्ट्री के मालिक महेंद्र गोयनका ने बीजेपी विधायक संजय पाठक पर तेंदुए का शव फेंकने के आरोप लगाए हैं, जिसके चलते अब तेंदुआ का यह मामला राजनीतिक मोड़ ले चुका है.



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