डेयरी के लिए खरीदने जा रहे दुधारू गाय-भैंस…तो ऐसे करें पशु का चयन, बिजनेस में कभी नहीं होगा नुकसान

डेयरी के लिए खरीदने जा रहे दुधारू गाय-भैंस…तो ऐसे करें पशु का चयन, बिजनेस में कभी नहीं होगा नुकसान


Dairy Farming: देशभर के किसानों के लिए पशुपालन और डेयरी व्यवसाय आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है. लेकिन, इस व्यवसाय की सफलता दुधारू पशुओं की सही खरीदारी पर टिकी है. विशेषज्ञों का कहना है कि गाय-भैंस खरीदने में की जाने वाली भूलें लाखों का नुकसान करा सकती हैं. अच्छी नस्ल, स्वस्थ और उच्च दूध उत्पादक क्षमता वाली गाय-भैंस चुनने से न केवल दूध उत्पादन बढ़ता है, बल्कि मुनाफा भी कई गुना होता है.

ऐसे करें स्वस्थ्य दुधारू पशु की पहचान
रीवा के पशु चिकित्सक डॉ. राजेश शर्मा बताते हैं, “दुधारू पशु की खरीद में 70% सफलता सही चयन पर निर्भर करती है, इसलिए किसानों को नस्ल, उम्र, स्वास्थ्य और दूध क्षमता की बारीकी से जांच करनी चाहिए.” दुधारू गाय की पहचान के लिए त्रिकोणीय आकार वाली नस्ल को प्राथमिकता दें. सामने खड़े होकर देखें तो अगला हिस्सा पतला और पिछला चौड़ा दिखे. पैर और माथे के बाल छोटे, चमड़ी चिकनी-चमकदार होनी चाहिए. आंखें चमकीली और थन पूर्ण विकसित हों. थनों पर उभरी, टेढ़ी-मेढ़ी दुग्ध शिराएं अधिक दूध की गारंटी देती हैं. दूध दोहन के बाद थन पूरी तरह सिकुड़ जाए और चारों थनों का आकार समान हो. पेट पर स्पष्ट, मोटी शिराएं भी उच्च उत्पादकता का संकेत हैं.

ऐसी गाय ही खरीदें
खरीदारी में दूसरे-तीसरे ब्यांत की गाय-भैंस चुनें, क्योंकि तब वे अपनी पूरी क्षमता से दूध देती हैं. यह क्रम सातवें ब्यांत तक चलता है. आदर्श रूप से एक माह ब्याही हुई मादा बच्चे वाली पशु लें, ताकि दूध क्षमता का पता चले और भविष्य की पूंजी (बछड़ी) भी मिले. दूध दोहन हमेशा तीन बार लगातार करवाएं. व्यापारी अक्सर एक बार ही दिखाते हैं या ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन देकर धोखा देते हैं. बचाव के लिए दोहन से आधा घंटा पहले बात करें, ताकि इंजेक्शन का असर कम हो.

पशु खरीदते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

1. उम्र की जांच दांतों से करें. निचले जबड़े में चार जोड़े स्थायी दांत: पहला 1.5 वर्ष, दूसरा 2.5 वर्ष, तीसरा 3 वर्ष अंत, चौथा 4 वर्ष अंत में निकलते हैं. इससे नई-पुरानी गाय की पहचान आसान होती है.

2. सींगों के छल्ले भी सहायक हैं. पहला 3 वर्ष में, फिर सालाना एक. लेकिन रेत से छल्ले मिटाने के धोखे से सावधान रहें. बूढ़े पशु की हड्डियां कमजोर, त्वचा ढीली, आंख-कान के बीच गड्ढा होता है.

3. युवा पशु चुस्त, चमकदार त्वचा वाला. बाजार में गर्भ जांच पशु चिकित्सक से करवाएं. सींग घिसे न हों, चमक काले तेल से न हो. बच्चा असली मां का हो, यह थनों से चूसवाकर जांचें.

4. फूले अंगों पर दबाव देकर हवा भरने का पता लगाएं. थनैला रोग से बचने के लिए थनों में गांठ-सूजन न हो. ढलान पर पीछे बिठाकर फूल (गर्भ) जांचें.

5. ओवरफीडिंग या चासनी से दूध बढ़ाने के धोखे से बचें. तीन-चार दिन निगरानी रखें. सफेद कपड़े से आंख-खुर पोछें. रिकॉर्ड वाले पशु (सरकारी फार्म से) प्राथमिकता दें, जहां जन्म-उत्पादन का पूरा इतिहास होता है. पशुपालन विभाग के अनुसार, सही चयन से दूध उत्पादन 20-30% बढ़ सकता है.



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