इंदौर में जारी तीन दिनी अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘ADDICTION-2025’ के दूसरे दिन नशे और तकनीकी लत के सामाजिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हुई। इसमें एक्सपर्ट्स ने बताया कि महिलाओं में नशे की आदत सिर्फ बढ़ ही नहीं रही है, बल्कि यह कई बार उन्हें हिंसा और अप
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डॉ. रविंद्र राव (AIMS दिल्ली)
उन्होंने कहा जब व्यक्ति नशे के प्रभाव में होता है तो उसका आत्म-नियंत्रण और निर्णय क्षमता खत्म हो जाती है। अपराध, हिंसा और हादसे अक्सर इसी अवस्था में घटित होते हैं। कई बार ऐसे केस देखे कि नशे के लिए जरूरी रुपए नहीं होने पर भी नशे का आदि व्यक्ति अपराध करने से पीछे नहीं हटता।विशेषज्ञों ने महिलाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर विशेष चिंता व्यक्त की।
डॉ. अतुल अंबेडकर, (AIIMS, नई दिल्ली) ने कहा हाल के कुछ मामलों में देखा गया है कि नशे या मानसिक असंतुलन की स्थिति में महिलाएं खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचा रही है। यह एक नया सामाजिक संकट है जिसे हमें गंभीरता से समझना होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं में नशे की आदतें चाहे अल्कोहल, निकोटिन या स्लीपिंग पिल्स हो परिवार और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रही है। यह केवल एक मेडिकल समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक असंतुलन की चेतावनी है।
‘ADDICTION-2025’ के अध्यक्ष डॉ. रामगुलाम राजदान ने बताया कि 7 नवंबर को कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन की शुरुआत समाज और कानून से जुड़े विषयों पर केंद्रित सत्रों के साथ होगी। दिन के आरंभिक सत्रों में “नशामुक्ति उपचार में सिविल सोसायटी और पेशेवर संगठनों की भूमिका”, “हेपेटाइटिस C और नशे का संबंध” तथा “युवा, प्रौद्योगिकी और मानसिक स्वास्थ्य: पूर्वानुमान, रोकथाम और नीतिगत दृष्टिकोण” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ प्रस्तुतियां देंगे।

डॉ. रामगुलाम राजदान, प्रेसिडेंट ‘ADDICTION-2025’
नेपाल से आए रबी शाक्य “संगीत और नशे के बीच जटिल संबंध” विषय पर विशेष व्याख्यान देंगे, जिसमें वे रचनात्मकता, भावनात्मक अभिव्यक्ति और नशे के प्रभाव के बीच के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे। इसके बाद कानून और सामाजिक संगठनों की भूमिका पर पैनल चर्चा होगी जिसमें डीआईजी (नारकोटिक्स) महेश चंद्र जैन, आनंद गौर, अनिल भंडारी, शफी शेख, और धनंजय भार्गव शामिल होंगे।