सचिन की तरह बनो, भीड़ में अलग दिखोगी, शेफाली ने पिता की बात को गांठ बांध लिया

सचिन की तरह बनो, भीड़ में अलग दिखोगी, शेफाली ने पिता की बात को गांठ बांध लिया


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शेफाली वर्मा ने महिला विश्व कप फाइनल में 87 रन की शानदार पारी खेलने के बाद दो विकेट चटकाकर भारत को विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई. शेफाली ने कहा कि उनके पिता हमेशा से यही कहते थे कि बनना है तो सचिन तेंदुलकर सर की तरह बनो. इससे तुम भीड़ में अलग दिखोगी. शेफाली को फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. वह विश्व कप फाइनल में यह पुरस्कार हासिल करने वाली यंगेस्ट क्रिकेटर बनीं.

शेफाली वर्मा के प्रेरणास्त्रोत सचिन तेंदुलकर हैं .

नई दिल्ली. भारत को महिला विश्व कप चैंपियन बनाने में अहम योगदान देने वाली ओपनर शेफाली वर्मा का कहना है कि अब हमें हर बार ट्रॉफी जीतने की आदत डालनी होगी. 21 साल की शेफाली ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में 87 रन की दमदार पारी खेली थी. उन्होंने बैटिंग में कमाल करने के बाद गेंदबाजी में दो विकेट लेकर धमाल मचाया. भारत की जीत में शेफाली का अहम योगदान रहा. विस्फोटक ओपनर शेफाली ने कहा कि हम हमें ट्रॉफी जीतने की आदत डालनी होगी. भारत ने फाइनल में साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराकर पहली बार विश्व कप अपने नाम किया.

करिश्माई सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा (Shafali Verma) की फाइनल में 87 रन की धमाकेदार पारी ने भारत को आसानी से मुकाबला जीतने में मदद की.शेफाली वर्मा ने कहा, ‘अब हमें हर बार कप जीतने की आदत डालनी होगी. मैं हरियाणा से हूं इसलिए जीतने का एक अलग ही जोश होता है और जन्म से ही हमें शीर्ष पर पहुंचने का लक्ष्य रखना और जीत के बारे में सोचना सिखाया जाता है. अगर आपकी जीत की मानसिकता है तो आप भीड़ में अलग ही नजर आएंगे.

शेफाली वर्मा के प्रेरणास्त्रोत सचिन तेंदुलकर हैं .

शेफाली बोलीं- हम एक सुनहरे दौर से गुजर रहे हैं
युवा सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने कहा कि मौजूदा टीम पिछली पीढ़ी के खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का फल पा रही है. उन्होंने कहा, ‘हम एक सुनहरे दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन हम यहां उनकी (पिछली पीढ़ी की क्रिकेटरों की) वजह से हैं. मेरी प्रेरणा सचिन सर (सचिन तेंदुलकर) हैं. मेरे पिताजी ने कहा था, ‘उनकी तरह बनो और तुम भीड़ में अलग दिखोगी.’

पावर-हिटर अपनी निडर और आक्रामक शैली के लिए जानी जाती हैं शेफाली वर्मा
हरियाणा के रोहतक से निकलीं पावर-हिटर अपनी निडर और आक्रामक शैली के लिए जानी जाती हैं. उन्हें ‘लेडी सहवाग’ या ‘बेबी सहवाग’ भी कहा जाता है. वह पुरुष और महिला क्रिकेट विश्व कप के इतिहास में फाइनल या सेमीफाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बन गईं. वह वर्ल्ड कप फाइनल में अर्धशतक (50+ रन) बनाने और 2 या उससे अधिक विकेट लेने वाली भी दुनिया की पहली क्रिकेटर हैं.

शेफाली वर्मा ने 8 साल की उम्र में क्रिकेट का बल्ला पकड़ा
हरियाणा के रोहतक की रहने वाली शेफाली का जन्म 28 जनवरी 2004 को हुआ था. उनका क्रिकेट से परिचय महज 8 साल की उम्र में हुआ. इसका श्रेय उनके पिता संजीव वर्मा को जाता है, जो खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे. रोहतक में लड़कियों के लिए क्रिकेट एकेडमी न होने के कारण शेफाली को शुरुआती दिनों में अपने बाल लड़कों की तरह कटवाने पड़े और लड़का बनकर ट्रेनिंग लेनी पड़ी. 2013 में, जब सचिन तेंदुलकर अपना आखिरी रणजी मैच रोहतक में खेल रहे थे, तब नन्ही शेफाली उन्हें देखने के लिए अपने पिता के कंधों पर घंटों खड़ी रहीं.

Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से… और पढ़ें

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