Youngest CA: 21 की उम्र, पहला प्रयास! CA Final में सतना के नारायण ने किया टॉप; ऐसे पूरा हुआ दादा जी का सपना

Youngest CA: 21 की उम्र, पहला प्रयास! CA Final में सतना के नारायण ने किया टॉप; ऐसे पूरा हुआ दादा जी का सपना


शिवांक द्विवेदी, सतना: मेहनत वही पहचान, जो वक्त से पहले कर दे कामयाब! सतना के युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट नारायण गुप्ता ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है. महज़ 21 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सीए फाइनल परीक्षा के दोनों ग्रुप पास कर शहर में प्रथम स्थान हासिल किया है. नारायण ने कुल 321 अंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे सतना जिले का नाम रोशन किया है.

शिक्षा से सफलता तक का सफर
लोकल 18 से बातचीत में लखन चौराहा निवासी नारायण गुप्ता ने बताया कि उनकी स्कूली शिक्षा सतना के बोनांजा कॉन्वेंट स्कूल से हुई. बारहवीं कक्षा के बाद ही उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया. इसके बाद उन्होंने इंदौर की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की जहां वर्ष 2024 में वे यूनिवर्सिटी टॉपर भी रहे. शिक्षा के प्रति समर्पण और कंसीटेंसी ने उन्हें एक मज़बूत नींव दी जिसका नतीजा आज जिले के सामने है.

पहले ही प्रयास में मिली सफलता
नारायण ने बारहवीं के तुरंत बाद सीए फाउंडेशन परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में शानदार अंकों से सफलता प्राप्त की. इसके बाद इंटरमीडिएट की तैयारी उन्होंने सतना में रहकर की, जहाँ उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ आत्मविश्वास को भी मज़बूत किया. इंटरमीडिएट परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने इंदौर की आनंद सकलेचा एंड कंपनी में अपनी ढाई साल की आर्टिकलशिप पूरी की. सितंबर 2025 में सीए फाइनल एग्जाम था, जिसके लिए उनके पास केवल तीन महीने का समय बचा था. इसके बावजूद उन्होंने पहली बार में दोनों ग्रुप पास करके सतना में डिस्ट्रिक्ट रैंक 1 हासिल की.

परिवार की भूमिका और बहन का योगदान
नारायण ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता, गुरुजनों और बड़ी बहन को दिया है. उन्होंने कहा कि उनकी दीदी खुद एक सीए एस्पिरेंट रही हैं और उन्होंने हमेशा हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया. बहन के अनुभवों से सीख लेते हुए नारायण ने अपनी गलतियाँ सुधारने पर विशेष ध्यान दिया. उन्होंने कहा की दीदी की गलतियों से मैंने बहुत कुछ सीखा और उन्हीं के अनुभवों से मैं आगे बढ़ पाया.

उनके पिता टिम्बर व्यापारी हैं, लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने कहा कि कभी-कभी लगा कि नारायण लक्ष्य से भटक न जाए , पर बेटे ने उम्मीद से कहीं अधिक कर दिखाया और अपने दादा जी का सपना पूरा किया. मां ने भी बेटे की मेहनत पर गर्व जताते हुए कहा कि नारायण ने न केवल परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम ऊँचा किया है. बड़ी बहन ने कहा हमारे बब्बा जी मुनीम थे और शहर भर में इसी नाम से जाने जाते थे और अब उनकी विरासत उनके पोते आगे बढ़ा रहे हैं. वहीं उनकी छोटी बहन ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि पढ़ाई के दिनों में वह नारायण को तंग करती थीं लेकिन अब वही उनके लिए रियल लाइफ इंस्पिरेशन बन गए हैं.

मेहनत, अनुशासन और निरंतरता का मंत्र
नारायण ने बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई में कंसिस्टेंसी और टाइम मैनेजमेंट को सबसे अहम माना. रोजाना 12 से 14 घंटे की पढ़ाई करते हुए भी उन्होंने खुद पर अत्यधिक दबाव नहीं डाला. उनका मानना है कि सीए कोर्स में मेहनत ज़रूरी है लेकिन उससे ज़्यादा ज़रूरी है निरंतरता और आत्मविश्वास. उन्होंने कहा चार से पाँच साल इस कोर्स में देना पड़ता है लेकिन जब सफलता मिलती है तो सारी मेहनत सार्थक लगती है.

सम्मान और प्रेरणा का माहौल
सफलता की खबर फैलते ही सतना में बधाइयों का दौर शुरू हो गया. जिले के कई अधिकारियों, नेताओं और शिक्षकों ने नारायण को शुभकामनाएँ दीं. परिवार के लोगों की आँखों में गर्व और खुशी के आँसू छलक पड़े. नारायण का कहना है कि अब वे कुछ समय खुद को रिलैक्स करना चाहते हैं और आगे के कदम अपने गुरुजनों और परिवार की सलाह से तय करेंगे.

युवाओं के लिए संदेश
नारायण ने सतना के युवाओं को संदेश देते हुए कहा की अगर मन में ठान लो तो कोई भी मंज़िल मुश्किल नहीं. बस लक्ष्य पर ध्यान रखो और हार मानना मत सीखो.  उनकी सफलता सिर्फ़ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं बल्कि यह प्रमाण है कि कम समय और संसाधनों के बाद भी बड़े सपने पूरे करने की क्षमता होती है.



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