कैलकुलेटर से भी तेज इस 5 साल की लड़की का दिमाग, आसानी से हल करती बड़े-बड़े हिसाब, दर्ज किया ये रिकॉर्ड

कैलकुलेटर से भी तेज इस 5 साल की लड़की का दिमाग, आसानी से हल करती बड़े-बड़े हिसाब, दर्ज किया ये रिकॉर्ड


Indian Super Talented Girl In Ujjain: धार्मिक नगरी उज्जैन में कई ऐसे अनगिनत सितारे छुपे हुए हैं, जो समय-समय पर बाहर निकल कर देश-दुनिया पर अपनी छाप छोड़ देते हैं. उन्हीं में से एक उज्जैन की नियति भी शामिल है. हैरान करने वाली बात यह है नियति की उम्र केवल 5 साल है और इन्होंने सुपर टैलेंटेड गर्ल का इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड का खिताब में नाम दर्ज करवा लिया है. आइए जानते हैं नियति को यह कामयाबी कैसे मिली है.

दरअसल, देखा जाता है छोटे बच्चे जिन्हें ठीक से पढ़ने लिखने में कठिनाई आती है. लेकिन उज्जैन की इस हौनहार बच्ची ने केवल 5 साल की उम्र में कुछ ऐसा कर दिखाया जिससे उज्जैन गौरवान्वित हुआ है. उज्जैन की बेटी नियति ने 9 डिजिट तक के Addition, Comparison, Dictation, Subtraction, Place Value को सॉल्व कर दिखाया है या कहें कैलकुलेटर की रफ्तार में 5 साल की बच्ची का दिमाग चलता है. बच्ची को इस का टेलेंट कहां से मिला आइए जानते हैं.

One in a million में जीता खिताब 
बच्ची के पिता अक्षय सिंह सोलंकी जो कि एक गवर्नमेंट कांट्रेक्टर है, उन्होंने बताया पढ़ाई यह बचपन से होशियार है. हमारी बच्ची को यह टैलेंट कोई गॉड गिफ्ट मिला है. मासूम बच्ची को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड ने जब One in a million “लाखों में एक” का खिताब दिया, तो साथ ही उसे सुपर टैलेंटेड गर्ल नाम भी दिया है. जिससे वो और परिवार बहुत ख़ुश है. अक्षय ने आगे बढ़ते हुए कहा कि इसका पूरा क्रेडिट पत्नी दीपाली और बेटी नियति को है. क्योंकि नियति की सीखने की लगन दीपाली की मेहनत का ये फल है. नियति को जब हम कही लेकर जाते हैं, तो ये रास्ते में गाड़ियों, दुकानों व अन्य जगह के नंबर पढ़ने में इंटरेस्टेड रहती है. मैथ्स के Sum सॉल्व करने में जुटी रहती है. पैन पेंसिल न मिले तो, हाथ से ही करने लगती है. ये सब भगवान का आर्शीवाद है.

टीचर निहारिका ने बताया बेटी का हुनर 
लोकल18 की टीम नें जब नियति की मां दीपाली से बात की तो. उन्होंने बताया कि वह छुट्टियों में इंदौर गई थी, उस दौरान एक महीने के गेप में हम नियति के भविष्य के बारे में सोचने लगे, फिर नियति को एक निहारिका मैडम के यहां मैथ्स क्लास के लिए भेजा. जहां 1 महीने उसे पढ़ाया गया. इसके बाद जब मैं उज्जैन आई, तो मैडम ने उसे ऑनलाइन क्लास लेकर पढ़ाया. जिसकी सप्ताह में 3 दिन क्लास होती थी. मैडम निहारिका ने ही हमें कहा आपकी बच्ची काफी टैलेंटेड है. इसे इंटरनेशनल एग्जाम में आप पार्ट दिलवाइए. हमने इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड के एग्जाम में पार्ट दिलवाया और आज खुशी हमारे घर में झलक रही है.

आइए जानते हैं कैसे होता है एग्जाम 
यह इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड साल भर में एक नोटिफिकेशन जारी करता है, आपके यहां पढ़ने वाले या आपके बच्चों में कोई टैलेंट हो तो उसे हमसे साझा कर सकते हैं. नियति की टीचर निहारिका ने बताया कि हमने उस नोटिफिकेशन के आधार पर नियति का नाम रजिस्टर्ड किया. जिसमें हमने बताया कि यह 5 साल की बच्ची है, जो 9 डिजिटल तक के नंबर सॉल्व कर सकती है. After Before बता सकती है. छोटे-छोटे मल्टीप्लिकेशन कर लेती है.

Addition,Comparison, Dictation, Subtraction, Place Value को चंद सेंकेड में सॉल्व कर देती है. इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड की टीम ने हमसे इसके प्रूफ मांगे. हमने नियति के मैथ्स सॉल्व करते हुए के अलग-अलग एंगल के वीडियो बनाए, जो कि सब ऑनलाइन टीम वॉच कर रही थी. ऑल इंडिया लेवल पर टीम ने फर्स्ट स्टेप में उसको चुना. इसके बाद इंटरनेशनल वन इन ए मिलियन लाखों में एक के तौर पर चुनकर सुपर टैलेंटेड गर्ल का अवार्ड दिया.



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