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Guava Gardening Tips: अगर आप ठंड मौसम में अमरुद की बागवानी करना चाहते हैं, तो सदिर्यो में लखनऊ 49, इलाहाबाद सफेदा और सरदार जैसी किस्मों की बागवानी कर सकते हैं.
अगर आप किसान हैं और अमरूद की खेती से तगड़ी कमाई करना चाहते हैं, तो अमरूद की ऐसी वैरायटी की बागवानी कर सकते हैं, जो अच्छा उत्पादन देती हैं.

छतरपुर नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉक्टर कमलेश अहिरवार बताते हैं कि अमरूद की किस्म का चयन फसल की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कुछ किस्में सर्दियों के मौसम में अधिक सहनशील होती हैं.

मध्यप्रदेश के छतरपुर बुंदेलखंड में वैरायटी में लखनऊ-49, इलाहाबाद सफेदा, ढोलका, चित्तीदार और ललित जैसी तमाम वैरायटी अमरूद की होती हैं. ये किस्में ठंड को बेहतर तरीके से सहन करती हैं और फसल की उपज को बढ़ाती है.

डॉ कमलेश बताते हैं कि अमरूद की फसल के लिए मिट्टी का स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है. बागवानी करने से पहले मिट्टी का परीक्षण कराना चाहिए, ताकि इसके पोषक तत्वों और पीएच स्तर का पता चल सके. इसके बाद, मिट्टी में खाद या जैविक पदार्थ मिलाकर उसकी संरचना और उर्वरता को बढ़ाना चाहिए.

डॉ कमलेश आगे बताते हैं कि मल्चिंग से बागवानी करना फायदेमंद होता है. मल्चिंग से मिट्टी की नमी बनी रहती है और खरपतवारों पर नियंत्रण पाया जाता है. साथ ही मिट्टी का तापमान स्थिर रहता है.

वहीं सर्दियों में अमरूद के पेड़ों को कम पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन, मिट्टी की नमी का स्तर बनाए रखना आवश्यक है कि गहरी सिंचाई तकनीक ड्रिप सिंचाई नमी को बनाए रखने के लिए प्रभावी होती है. इस प्रणाली से पानी सीधे जड़ों तक पहुंचता है और जल की बर्वादी कम होती है.

डॉ कमलेश बताते हैं कि सर्दियों में उर्वरक का उपयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए. संतुलित उर्वरक कार्यक्रम के तहत नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम का सही अनुपात महत्वपूर्ण होता है. रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक उर्वरकों जैसे वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद करता है.

डॉ कमलेश बताते हैं कि फलों और पौधों के आस-पास सफाई बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि गिरे हुए फल कीटों और रोगों के लिए आश्रय बन सकते हैं. साथ ही पौधों को ठंड से बचाने के लिए कपड़े से ढकना या पॉलीहाउस का उपयोग करना चाहिए.